एनजीटी ने बालू खदान संचालक से 1.84 करोड़ के पर्यावरण मुआवजा वसूलने के दिए निर्देश
पर्यावरण एनओसी निरस्त करने और खनन पट्टा रद्द करने पर निर्णय लेने को कहा
बांदा, 09 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में गिरवां थाना क्षेत्र के बहादुरपुर स्योढ़ा स्थित मौरम खनन क्षेत्र में कथित अवैध खनन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। कांग्रेस नेता एवं उद्यमी संजीव कुमार अवस्थी की याचिका पर सुनवाई के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को खदान संचालक लक्ष्मीनारायण गुप्ता के मामले में 1,84,92,179.70 रुपये के पर्यावरण मुआवजे की सिफारिश की है। एनजीटी ने पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन से संबंधित लंबित नोटिसों पर निर्णय लेने और खदान की पर्यावरणीय स्वीकृति तथा पट्टे के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मामला गिरवां थाना क्षेत्र के बहादुरपुर स्योढ़ा में मौरम खंड की गाटा संख्या 300 एम और 316 एम से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि खनन क्षेत्र में लिफ्टर, सक्शन मशीन और अर्थ मूविंग पोकलैंड मशीनों का इस्तेमाल कर खनन किया गया। आरोप है कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्र का फायदा उठाकर केन नदी की जलधारा में भी नियमों के विपरीत खनन किया जाता रहा। इस गतिविधि से नदी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की शिकायत की गई थी।
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) और जिलाधिकारी बांदा को खदान की पर्यावरणीय स्वीकृति (ईसी) वापस लेने तथा खनन पट्टा निरस्त करने के संबंध में नियमानुसार निर्णय लेने को कहा है। अधिकरण ने जिलाधिकारी और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय क्षति के मुआवजे से संबंधित लंबित नोटिसों पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मामले में खनन पट्टे की शर्तों और पर्यावरणीय स्वीकृति के प्रावधानों के उल्लंघन पर कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया गया है। निर्देशों के तहत संबंधित प्रावधानों के अनुसार पर्यावरणीय स्वीकृति निरस्त करने, खनन पट्टा रद्द करने और अर्थदंड लगाने के विकल्पों पर नियमानुसार निर्णय लिया जाना है। हालांकि, इन कार्रवाइयों की अंतिम स्थिति संबंधित विभागों के निर्णय पर निर्भर करेगी।
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिलाधिकारी बांदा को खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू कराने को कहा है। इसके तहत खनिजों के परिवहन की निगरानी, चेकपोस्ट की व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की स्थापना, ड्रोन सर्वे और जीपीएस ट्रैकिंग जैसे उपायों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से निगरानी करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माना, पर्यावरण मुआवजा और अन्य दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन उपायों का उद्देश्य अवैध खनन पर अंकुश लगाना और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
उद्यमी संजीव अवस्थी का कहना है कि बहादुरपुर स्योढ़ा मौरम खदान को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की गई और खनन गतिविधियों में कथित अनियमितताओं और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे। अब एनजीटी के निर्देशों के बाद खदान की पर्यावरणीय स्वीकृति, पट्टे की वैधता और मुआवजे से जुड़े मामलों में कार्रवाई का इंतजार है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह

