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धार में लोकायुक्त के छापे में सहकारी समिति प्रबंधक की अकूत संपत्ति का खुलासा

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धार में लोकायुक्त के छापे में सहकारी समिति प्रबंधक की अकूत संपत्ति का खुलासा


धार में लोकायुक्त के छापे में सहकारी समिति प्रबंधक की अकूत संपत्ति का खुलासा


तीन ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई, 271 प्रतिशत से अधिक अनुपातहीन संपत्ति मिली

धार, 04 नवंबर (हि.स.)। सरकारी नौकरी में करीब 20 साल का सेवाकाल, पूरे कार्यकाल में लगभग 65 लाख रुपये का वेतन और संपत्तियों पर खर्च दो करोड़ 41 लाख रुपये से अधिक! आमदनी और संपत्ति के बीच यह भारी अंतर धार जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति नालछा के प्रबंधक शेरसिंह ठाकुर को लोकायुक्त की जांच के घेरे में ले आया है।

लोकायुक्त पुलिस की तीन अलग-अलग टीमों ने धार जिले के सोडपुर, नालछा और मांडव स्थित उनके ठिकानों पर बुधवार अलसुबह एक साथ छापेमारी की तो शुरुआती जांच में ही 271 प्रतिशत से अधिक अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ। करीब 97 लाख रुपये की लागत से बना दो मंजिला आलीशान मकान, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, लाखों रुपये की कृषि भूमि, जेसीबी, ट्रैक्टर, कार, बुलेट और आधुनिक कृषि उपकरणों ने जांच अधिकारियों को भी विस्तृत पड़ताल के लिए मजबूर कर दिया है।

लोकायुक्त को कई ऐसी संपत्तियों और वाहनों के सुराग भी मिले हैं, जिनकी वास्तविक मालिकाना स्थिति की जांच की जा रही है। बैंक खातों, लॉकरों और जमीन की रजिस्ट्रियों की पड़ताल जारी है। अधिकारियों का अनुमान है कि जांच आगे बढ़ने के साथ संपत्ति का आंकड़ा ढाई करोड़ रुपये से भी ऊपर पहुंच सकता है।

लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश पर एसपी राजेश सहाय के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। बुधवार तड़के तीन अलग-अलग टीमों ने एक साथ सोडपुर, नालछा और मांडव में दबिश दी। कार्रवाई का उद्देश्य शेरसिंह ठाकुर की आय के ज्ञात स्रोतों और उनके द्वारा अर्जित संपत्तियों के बीच अंतर का पता लगाना था। शुरुआती पड़ताल में जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए अर्जित संपत्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ठाकुर का लगभग 20 वर्षों का सेवाकाल रहा और इस अवधि में उनका कुल वेतन करीब 65 लाख रुपये आंका गया है। इसके विपरीत विभिन्न संपत्तियों और वाहनों पर उनका खर्च दो करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपये से अधिक पाया गया। लोकायुक्त की प्रारंभिक गणना में यह ज्ञात वैध आय से 271 प्रतिशत से अधिक अनुपातहीन संपत्ति का मामला बनता है।

सोडपुर में ठाकुर का 2400 वर्गफीट क्षेत्रफल में बना दो मंजिला भव्य मकान जांच के केंद्र में है। इसकी अनुमानित लागत करीब 97 लाख रुपये बताई गई है। नालछा में मांडव रोड तिराहे पर 1350 वर्गफीट क्षेत्रफल में बना व्यावसायिक भवन भी सामने आया है, जिसकी लागत लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अतिरिक्त पत्नी के नाम पर मांडव में 2.526 हेक्टेयर कृषि भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत 42 लाख रुपये है, तथा सोडपुर में 0.645 हेक्टेयर कृषि भूमि, जिसकी कीमत करीब आठ लाख रुपये बताई गई है, का भी पता चला है। संपत्तियों की सूची यहीं समाप्त होती दिखाई नहीं दे रही। जांच के दौरान अन्य भवनों और अतिरिक्त कृषि उपकरणों के बारे में भी जानकारी मिली है, जिनका मूल्यांकन किया जा रहा है।

संपत्ति के इस कथित साम्राज्य में महंगे वाहनों और मशीनों का भी बड़ा हिस्सा सामने आया है। लोकायुक्त की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जेसीबी, महिंद्रा ट्रैक्टर, महिंद्रा टीयूवी, ऑल्टो कार, बुलेट मोटरसाइकिल और आधुनिक कृषि यंत्रों पर लगभग 53 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। जांच अधिकारी अब यह पता लगा रहे हैं कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और उनके भुगतान का वास्तविक स्रोत क्या था। कई अन्य ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के स्वामित्व का भी सत्यापन किया जा रहा है। कुछ संपत्तियों के बेनामी होने की आशंका के चलते उनके दस्तावेज और वास्तविक उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

कार्रवाई के दौरान डीएसपी आनंद चौहान, टीआई आशुतोष मिठास, प्रतिभा तोमर और सचिन पटेरिया के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें दस्तावेजों की छानबीन में जुटी हैं। बैंक खातों, बैंक लॉकरों, जमीन की रजिस्ट्रियों और संपत्तियों से जुड़े मूल दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों की निगाह उन वित्तीय लेनदेन पर भी है, जिनके जरिए संपत्तियां खरीदी गईं। प्रारंभिक जांच में सामने आए भवनों, जमीन और वाहनों के अतिरिक्त अन्य संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है। लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, तलाशी पूरी होने के बाद ही संपत्तियों के वास्तविक मूल्य और आय के अनुपात में उनके अंतर की विस्तृत तस्वीर सामने आएगी।

इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। कार्रवाई अभी जारी है। जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि करीब 65 लाख रुपये के कुल वेतन के मुकाबले 2.41 करोड़ रुपये से अधिक का संपत्ति व्यय कैसे हुआ। यदि जांच में सामने आए अन्य भवनों, कृषि उपकरणों, वाहनों और बैंक खातों में जमा रकम की पुष्टि होती है तो अनुपातहीन संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है। फिलहाल लोकायुक्त की तीनों टीमें दस्तावेजों और संपत्तियों का मिलान कर रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / Gyanendra Tripathi