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मऊगंज में करंट की चपेट में आने से मादा हाथी की मौत, सूंड में फंसा था बिजली का तार

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मऊगंज में करंट की चपेट में आने से मादा हाथी की मौत, सूंड में फंसा था बिजली का तार


मऊगंज, 19 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में शनिवार को एक मादा हाथी की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा मलकपुर क्षेत्र में हुआ, जहां घूमते समय हाथी की सूंड में विद्युत प्रवाहित खुला तार फंस गया। करंट की चपेट में आते ही मादा हाथी ने मौके पर दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए।

बताया जा रहा है कि हाथियों का यह जोड़ा पिछले करीब छह महीने से मऊगंज के साथ-साथ रीवा और सीधी जिले के अलग-अलग इलाकों में विचरण कर रहा था। इतने लंबे समय से क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी के बावजूद मादा हाथी की करंट लगने से मौत होने की घटना ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक मादा हाथी हाथियों के जोड़े के साथ मलकपुर क्षेत्र में घूम रही थी। इसी दौरान वह खुले विद्युत तार की चपेट में आ गई। बताया गया है कि करंट प्रवाहित तार उसकी सूंड में फंस गया। तार के संपर्क में आते ही उसे जोरदार करंट लगा और उसने वहीं दम तोड़ दिया।

हाथी की मौत की खबर आसपास के इलाके में तेजी से फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों के बीच वन्यजीव की इस तरह मौत को लेकर चर्चा शुरू हो गई। घटना की जानकारी लगते ही डीएफओ लोकेश नीरापुरे भी पहुंचे। उन्‍होंने बताया कि हाथी की मौत के मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मलकपुर के पास ही हाथी का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

स्थानीय जानकारी के अनुसार हाथियों का यह जोड़ा करीब छह महीने से मऊगंज, रीवा और सीधी जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में घूम रहा था। इस दौरान क्षेत्र के लोगों को हाथियों की मौजूदगी की जानकारी थी। ऐसे में मादा हाथी की बिजली के तार की चपेट में आने से हुई मौत ने वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खासकर उन स्थानों पर खुले विद्युत तारों को लेकर चिंता जताई जा रही है, जहां से वन्यजीवों के गुजरने की संभावना रहती है। ग्रामीणों का सवाल है कि लंबे समय से क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही के बावजूद उनके संभावित मार्गों पर विद्युत तारों से होने वाले खतरे को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

हाथी की मौत की सूचना मिलने के बाद वन विभाग को भी इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद विभागीय टीम के मौके पर पहुंचने और आगे की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी सामने आई है। हालांकि हाथी की मौत की पूरी परिस्थितियां क्या रहीं और खुले विद्युत तार की स्थिति कैसी थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

हादसे के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि जब हाथियों का जोड़ा लंबे समय से मऊगंज, रीवा और सीधी क्षेत्र में विचरण कर रहा था, तब उनके संभावित आवागमन वाले इलाकों में विद्युत लाइनों को लेकर पहले से जरूरी सावधानियां क्यों नहीं बरती गईं। मादा हाथी की मौत के बाद अब उसके साथ मौजूद दूसरे हाथी की सुरक्षा भी बड़ी चिंता बन गई है। क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग के सामने उनकी निगरानी और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की चुनौती है।

मलकपुर की घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों के आवागमन वाले क्षेत्रों में बिजली के खुले और प्रवाहित तारों से पैदा होने वाले खतरे को सामने ला दिया है। अब स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों की नजर इस बात पर है कि विभाग दूसरे हाथी की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए विद्युत व्यवस्था में किस तरह के सुरक्षा उपाय किए जाते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी