मानपुर के राइस मिल में आग से हजारों क्विंटल धान जलने का दावा, उपार्जन धान के प्रबंधन पर उठे सवाल
उमरिया, 09 जुलाई (हि.स.)। उमरिया जिले के मानपुर क्षेत्र स्थित डी.के. राइस मिल में गुरूवार को भीषण आग लगने के बाद उपार्जित धान के भंडारण और मिलिंग व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आगजनी की घटना में बड़ी मात्रा में धान जलकर नष्ट होने का दावा किया जा रहा है। वहीं, मामले को लेकर नागरिक आपूर्ति निगम और वेयरहाउस प्रबंधन के अधिकारियों के बयान भी सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार, समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान को नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा विभिन्न राइस मिलों में भंडारण के लिए रखा गया था। निर्धारित व्यवस्था के तहत मिलरों को धान की मिलिंग कर चावल वेयरहाउस में जमा कराना था। आरोप है कि मानपुर क्षेत्र के कुछ मिलरों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
बताया जा रहा है कि डी.के. राइस मिल, बस्कुटा द्वारा इस वर्ष भंडारण नहीं किया गया था, लेकिन मिलिंग के लिए 17 लॉट धान का उठाव किया गया। एक लॉट में 433 क्विंटल धान के हिसाब से कुल 7,361 क्विंटल धान उठाया गया था। आग लगने के बाद दावा किया जा रहा है कि मिल परिसर में रखा पूरा धान जलकर नष्ट हो गया।
वेयरहाउस के जिला प्रबंधक लक्ष्मी मरावी ने बताया कि संबंधित मिल द्वारा अब तक एक भी लॉट चावल जमा नहीं कराया गया है।
वहीं, प्रभारी जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम रोहित सिंह बघेल ने बताया कि मुख्यालय के निर्देशानुसार मिलरों को निर्धारित सुरक्षा राशि जमा करने के बाद धान उठाने की अनुमति दी जाती है। उनके अनुसार डी.के. राइस मिल ने प्रति लॉट निर्धारित राशि के एवज में डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) और चेक जमा किए थे। उन्होंने कहा कि यह जांच की जाएगी कि राशि कब जमा की गई थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संबंधित मिल द्वारा अब तक चावल जमा नहीं कराया गया है। हालांकि विभाग की ओर से लगातार इसके लिए कहा जाता रहा और शासन का कोई भी बकाया नहीं छोड़ा जाएगा, नियमानुसार पूरी राशि की वसूली की जाएगी।
उधर, स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर उपार्जित धान के प्रबंधन और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। हालांकि कथित धान घोटाले अथवा अनियमितताओं के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र त्रिपाठी

