मैहर : डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसा सेवानिवृत्त कर्मचारी, साइबर ठगों ने 22 लाख रुपये ठगे
मैहर, 02 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। अमरपाटन क्षेत्र के एक सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर साइबर अपराधियों ने 22 लाख रुपये की ठगी कर ली। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
मंगलवार को पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार अमरपाटन निवासी सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी मानेन्द्र सिंह को 5 मई 2026 को एक अज्ञात कॉल प्राप्त हुआ। कॉल करने वालों ने स्वयं को टेलीकॉम विभाग, दिल्ली पुलिस, सीबीआई और आरबीआई का अधिकारी बताते हुए उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग तथा करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन का मामला दर्ज होने की बात कही।
आरोपितों ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर कई दिनों तक व्हाट्सएप कॉल, वीडियो कॉल और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से उन्हें मानसिक दबाव में रखा। इसके बाद बैंक खातों और एफडी की जानकारी हासिल कर जांच के नाम पर उनकी सावधि जमा (एफडी) तुड़वाई गई।
ठगों ने आरबीआई जांच और सत्यापन प्रक्रिया का हवाला देते हुए पीड़ित से आरटीजीएस के माध्यम से एक निजी कंपनी के खाते में कुल 22 लाख रुपये जमा करा लिए। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी, लेकिन रकम जमा होने के बाद संपर्क टूट गया। तब पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
क्या है डिजिटल अरेस्ट?
साइबर अपराधी अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आरबीआई, आयकर विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे गिरफ्तारी, वारंट, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य कानूनी मामलों में फंसाने की धमकी देकर पीड़ित को मानसिक रूप से दबाव में लेते हैं और फिर बैंक खातों से धनराशि ट्रांसफर करा लेते हैं। वास्तव में भारत में किसी भी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता।
पुलिस ने जारी की चेतावनी
मैहर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति फोन, व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के जरिए खुद को किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट की धमकी देता है तो घबराएं नहीं और उसकी बातों में न आएं।
पुलिस ने लोगों को ओटीपी, पासवर्ड, बैंक खाते या वित्तीय जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करने तथा किसी के कहने पर धनराशि ट्रांसफर न करने की सलाह दी है। साथ ही किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने या साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर सूचना देने का आग्रह किया है।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

