अभी हाल ही में बिहार-नेपाल बॉर्डर पर रक्सौल में गिरफ्तार किया गया बिहार का बाहुबली राजन तिवारी उत्तर प्रदेश में कभी BJP से ही राजनीति शुरू करना चाहता था. उसने बहुत कोशिश की पर सफल नहीं हो पाया. कहा जा रहा है कि यूपी के टॉप 60 माफिया की लिस्ट में शामिल राजन की गिरफ्तारी की पूरी पटकथा यूपी की योगी सरकार ने ही लिखी. योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही राजन को माफिया घोषित कर दिया गया. एडीजी जोन गोरखपुर अखिल कुमार ने राजन तिवारी का आपराधिक इतिहास खंगाला. पता चला कि वह 8 मर्डर, अपहरण, अवैध वसूली समेत 40 से ज्यादा मुकदमों में आरोपित है. साल 2005 से एक मुकदमे में उसके खिलाफ वॉरंट भी जारी हो चूका है. इसी मुकदमे में स्टैंडिंग वॉरंट तामील करवाकर राजन की गिरफ्तारी की गई. अब पुलिस राजन की गोरखपुर स्थित संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है. वॉरंटी होने के बावजूद आया था, BJP जॉइन करने
माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ गैंगस्टर ऐक्ट में साल 2005 के 1 मुकदमे में 17 साल से वॉरंटी होने के बाद भी राजन तिवारी साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP जॉइन करने लखनऊ आया था. कहा जाता है कि बिहार में रह रहे BJP से जुड़े एक बड़े नेता (जिनका यूपी की राजनीति में खासा दखल था) के जरिए उसकी जॉइनिंग की तैयारी भी हो गई थी. पिछली सरकार में मंत्री रहे एक मौजूदा विधायक ने राजन तिवारी की जॉइनिंग भी करवाई थी, लेकिन बाद में पार्टी के 2 कद्दावर नेताओं में ठन गई और राजन को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. श्रीप्रकाश शुक्ला का भरोसेमंद साथी था
राजन अपने 2 भाइयों के साथ गोरखपुर में रहता था और उसने वहीं पढ़ाई की. गोरखपुर विवि के छात्रसंघ चुनाव के दरमियान अध्यक्ष प्रत्याशी के समर्थन में राजन ने जमकर बवाल किया था. तब उसका नाम पहली बार गोरखपुर में चर्चा में आया था, लेकिन अपराध की दुनिया में उसको पहचान 24 अक्टूबर, 1996 में गोरखपुर कैंट से विधायक रहे वीरेंद्र प्रताप शाही पर हुए हमले में मिली. इस मुकदमे में राजन तिवारी माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ नामजद हुआ. जब लखनऊ में शाही की हत्या हुई तो उसमें भी राजन, श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ नामजद हुआ. राजन पर उस दरमियान ताबड़तोड़ कई मामले दर्ज हुए. यूपी से फरारी काटने बिहार गया, बन गया विधायक
शाही पर हुए हमलों के बाद राजन फरारी काटने बिहार भग गया. वहां रिश्ते में उसके मामा लगने वाले गोविंदगंज के विधायक देवेंद्र दुबे का पनाह मिला. इस दौरान देवेन्द्र की निर्मम हत्या हो गई. इस हत्याकांड में बिहार के तत्कालीन मंत्री बृज बिहारी प्रसाद का नाम सामने आया. कुछ समय बाद प्रसाद की भी हत्या हो गई. इस हत्याकांड में भी श्रीप्रकाश और राजन तिवारी का नाम खूब सुर्खिया बटोरा. अब यह कहा जाने लगा कि राजन ने अपने मामा की हत्या का बदला लिया. इस हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद बेउर जेल में रहते हुए राजन तिवारी ने गोविंदगंज से चुनाव लड़ा और चुनाव जीत गया. साल 2014 में राजन बृज बिहारी हत्याकांड से बरी हो गया. बाद में कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक अजीत सरकार की हत्या में भी राजन का नाम बिहार के बाहुबली सांसद पप्पू यादव के साथ जोड़ा गया. कुछ समय बाद इस मामले में दोनों बरी हो गए. जेल पहुंचते ही खुद को बताया बीमार, नहीं मिली छूट
पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद राजन को तत्काल गैंगस्टर कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. जेल पहुंचते ही राजन ने खुद को बीमार बताकर हॉस्पिटल में भर्ती करवाने का दबाव बनाया पर जेल प्रशासन ने उसे बैरक में भेज दिया। अब उसे बिहार की रक्सौल जेल से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जेल में भेज दिया गया है.