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नेरचौक मेडिकल कॉलेज में महिला मरीज और उसकी मां पर नर्स से दुर्व्यवहार का आरोप

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मंडी, 15 मार्च (हि.स.)। लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नैरचौक के साइकोलॉजी विभाग में शनिवार रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब वहां उपचाराधीन एक महिला मरीज और उसकी माता ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ के साथ जमकर हंगामा किया और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह पूरी घटना शनिवार रात करीब 9:15 बजे की है जब साइकोलॉजी विभाग में नशे के उपचार हेतु भर्ती एक महिला मरीज ने अचानक उग्र रूप धारण कर लिया और वहां मौजूद स्टाफ नर्स के साथ अभद्र व्यवहार करना शुरू कर दिया, जो कि दुर्भाग्यवश उस समय वार्ड में अकेली ड्यूटी पर तैनात थीं और शारीरिक रूप से दिव्यांग भी बताई जा रही हैं। ।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विवाद की शुरुआत किसी मामूली बात को लेकर हुई थी, लेकिन देखते ही देखते महिला मरीज और उसकी मां ने अपना आपा खो दिया और दिव्यांग नर्स को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब महिला मरीज ने खुद को शहर का एक रसूखदार और बड़ा वकील बताते हुए कानून का धौंस दिखाया और विभाग की अत्यंत महत्वपूर्ण केस फाइलें व अन्य सरकारी दस्तावेज उठाकर फाड़ दिए। इस दौरान वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने जब हस्तक्षेप करने का प्रयास किया, तो महिला ने उन्हें यह कहकर डराने की कोशिश की कि वे एक महिला पर हाथ नहीं उठा सकते, जिससे सुरक्षा गार्ड भी बेबस नजर आए। जब तक अस्पताल प्रशासन महिला सुरक्षा कर्मियों को मौके पर बुला पाता, तब तक मरीज और उसकी मां ने वार्ड में काफी नुकसान कर दिया था और माहौल को पूरी तरह तनावपूर्ण बना दिया था।

इस घटना के दौरान दिव्यांग नर्स काफी सहमी हुई नजर आईं क्योंकि उन्हें लंबे समय तक मां-बेटी के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा। बाद में अस्पताल के अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों और सुरक्षा दल ने बड़ी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया और घटना की पूरी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी। अस्पताल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।

स्वास्थ्य कर्मियों के संगठनों ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है और मांग की है कि ड्यूटी पर तैनात दिव्यांग कर्मियों और महिला स्टाफ की सुरक्षा के लिए अस्पताल परिसर में पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वर्तमान में अस्पताल प्रशासन पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है और फाड़े गए दस्तावेजों की बहाली व कानूनी प्रक्रिया को लेकर कानूनी विशेषज्ञों से भी राय ली जा रही है ताकि राजकीय कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के तहत आवश्यक कदम उठाए जा सकें। इधर इस बारे उप प्रधानाचार्य डॉ रमेश से बात हुई तो उन्होंने कहा कि ऐसी घटना की जानकारी स्टाफ ने दी है और इसकी पुलिस में शिकायत कर मामला दर्ज करवाया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा