कैलाश पाटीदार हत्याकांड में 13 आरोपितों को आजीवन कारावास, 52 हजार रुपये जुर्माना
धार, 1 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिले के तिरला थाना क्षेत्र के ग्राम आहू में मार्च 2023 में हुए बहुचर्चित कैलाश पाटीदार हत्याकांड में न्यायालय ने सभी 13 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश धार, पीठासीन अधिकारी श्रीमती संगीता पटेल की अदालत ने गुरुवार को मामले में फैसला सुनाया। न्यायालय ने सभी आरोपितोंं पर कुल 52 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन के अनुसार 18 मार्च 2023 को ग्राम आहू के सिलौदी वाले खेत में कैलाश पाटीदार अपने पुत्र आलोक और बहू रुनाबाई के साथ दोपहर करीब 12 से 12:30 बजे गेहूं की कटाई कर रहे थे। इसी दौरान पुराने जमीन विवाद को लेकर कैलाश के बड़े भाई के परिवार के सदस्य और अन्य आरोपित धारिया व लाठियां लेकर खेत पर पहुंचे। आरोपितों ने कैलाश पाटीदार, उनके पुत्र आलोक और बहू रुनाबाई पर हमला कर दिया।
हमले में कैलाश पाटीदार के सिर, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। वहीं आलोक और रुनाबाई को भी सिर, हाथ, कोहनी, छाती सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोटें लगीं। गंभीर रूप से घायल कैलाश पाटीदार को उपचार के लिए धार के भोज अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद आलोक और रुनाबाई को भी धार भोज चिकित्सालय से निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका उपचार कराया गया।
मामले में तिरला थाना पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 147, 148, 294 और 325 सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया।
प्रकरण में विष्णु, मोहित, विक्रम, राधेश्याम, विजय, भगवान, लक्ष्मीबाई, ममताबाई, घनश्याम (पिता नारायण), घनश्याम, गौतम, कालूराम और जयेश को आरोपित बनाया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 18 गवाहों के बयान कराए गए। इसके अलावा 97 अभियोजन दस्तावेज और जब्त किए गए 16 आर्टिकल न्यायालय में प्रस्तुत कर उनका परीक्षण कराया गया। बचाव पक्ष की ओर से सात गवाहों के बयान तथा 55 दस्तावेज प्रतिरक्षा में प्रस्तुत किए गए।
न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत सभी साक्ष्यों और दस्तावेजों का परीक्षण किया। घायल आलोक और रुनाबाई की गवाही तथा मृतक कैलाश पाटीदार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी फैसले में आधार बनाया गया। साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने सभी 13 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई।
न्यायालय ने सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 147 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड तथा धारा 148 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास और 2,000 रुपये अर्थदंड तथा धारा 325/149 के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये अर्थदंड लगाया गया। इस तरह प्रत्येक आरोपी पर कुल 4,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। 13 आरोपियों पर लगाया गया कुल अर्थदंड 52,000 रुपये है।
आरोपित लक्ष्मीबाई पूर्व से जमानत पर थी। न्यायालय ने उसका जमानत आदेश निरस्त करते हुए उसे जिला जेल धार भेजने के निर्देश दिए। वहीं अन्य आरोपी पहले से जेल में बंद हैं, इसलिए उनके सजा वारंट तैयार किए गए।
प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक श्री शरद कुमार पुरोहित ने पैरवी की। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सभी 13 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास सहित अन्य सजाएं सुनाईं।
हिन्दुस्थान समाचार / Gyanendra Tripathi

