कटनी में भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी से 1.49 करोड़ की साइबर ठगी, व्हाट्सऐप संदेश के जरिए कराया रकम ट्रांसफर
कटनी, 13 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के कटनी में भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी कंपनी के साथ करीब 1 करोड़ 49 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने कंपनी के वरिष्ठ निदेशक के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को व्हाट्सऐप संदेश भेजा और कंपनी के खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर करा ली। ठगी का पता चलने के बाद कंपनी की ओर से तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, घटना बुधवार दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच की बताई जा रही है। उस समय भाजपा विधायक संजय पाठक विमान में थे। ठगों ने मैसर्स रामचंद्र फर्म के वरिष्ठ निदेशक के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते हुए कंपनी के अकाउंटेंट शैलेश तिवारी को व्हाट्सऐप पर संदेश भेजा। संदेश में 1 करोड़ 49 लाख रुपये तत्काल ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
अकाउंटेंट को लगा कि संदेश कंपनी के वरिष्ठ निदेशक की ओर से ही भेजा गया है। इसी भरोसे में उन्होंने बिना किसी संदेह के बताए गए खाते में पूरी रकम स्थानांतरित कर दी। कुछ समय बाद कंपनी को लेनदेन पर संदेह हुआ तो वरिष्ठ निदेशक से संपर्क किया गया। उन्होंने ऐसा कोई संदेश भेजने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद कंपनी को साइबर ठगी का पता चला।
शाम को जब संजय पाठक कंपनी पहुंचे तो उन्हें घटना की जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने तत्काल कटनी पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा से संपर्क कर मामले से अवगत कराया। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए देर रात रंगनाथ थाना क्षेत्र में शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
कोलकाता के खाते में पहुंची रकम
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम जिस बैंक खाते में भेजी गई, वह कोलकाता से संबंधित है। पुलिस ने तत्काल संबंधित खाते को होल्ड करा दिया। पुलिस के अनुसार, खाते में मौजूद करीब 20 से 22 लाख रुपये की राशि सुरक्षित कराई जा सकी है।
पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा के अनुसार, अकाउंटेंट शैलेश तिवारी ने शिकायत दर्ज कराई है कि व्हाट्सऐप नंबर से संदेश भेजकर वरिष्ठ अधिकारी का नाम और आवाज इस्तेमाल करते हुए उनसे 1 करोड़ 49 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। शिकायत मिलते ही पुलिस टीम को सक्रिय किया गया और जिस खाते में रकम भेजी गई थी, उसे होल्ड करा दिया गया है। मामले में साइबर ठगी के तरीके, रकम के लेनदेन और आरोपितों की पहचान को लेकर जांच जारी है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगों ने वरिष्ठ निदेशक के मोबाइल नंबर और उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी कैसे हासिल की तथा रकम ट्रांसफर कराने के लिए कंपनी की आंतरिक व्यवस्था की जानकारी उन्हें किस माध्यम से मिली। मामले में बैंक लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश चतुर्वेदी

