टटलूबाजी गैंग : रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ज्यादा नगदी कीमती सामान ले जाने पर धोखाधड़ी करने वाली गैंग का खुलासा
तीन आरोपी गिरफ्तार, आरोपित बंगाली, बिहारी एवं राजस्थानी भाषा के जानकार
जोधपुर, 2 जुलाई (हि.स.)। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ज्यादा या कीमती सामान ले जाने पर पकड़े जाने का डर बताकर धोखाधड़ी करने वाली टटलूबाजी गैंग को राजकीय रेलवे पुलिस जोधपुर ने खुलासा किया है। तीन आरोपिताें को पकड़ा गया है। आरोपित बड़े शातिर है जोकि बंगाली, बिहारी और राजस्थानी भाषा के जानकारी रखते है, साथ ही यात्रियों को ज्यादा नगदी एवं कीमती सामान ले जाने पर अमाउण्ट कार्ड (अपने स्तर पर बनाया गया तरीका) बनाए जाने का झांसा देते है। रेलवे पुलिस ने 7 मई को दर्ज एक प्रकरण का खुलासा किया है।
उल्लेखनीय है कि गत 7 मई को पश्चिमी बंगाल के भावेश धोलाई ने जीआरपी थाना जोधपुर पर रिपोर्ट दी थी। इसके अनुसार वह प्लेटफार्म 2 पर गाड़ी का इन्तजार कर रहा था, समय करीब 8:10 मिनट शाम को दो अज्ञात व्यक्ति आए, जिन्होंने कहा कि तेरे पास क्या है, तब मैने कहा कि मेरे पास 15 ग्राम सोना है, कुछ रुपए मेरे पास है। तब उन्होंने पूछा आपको कहा जाना है, तब मैंने बोला- पश्चिम बंगाल जाना है। फिर उन्होंने कहा कि तेरे पास सोना है इसका कार्ड बनवाना पड़ेगा। इस तरह से उन्होंने बातों मे उलझा कर धोखाधडी करके 15 ग्राम सोना और मेरा मोबाइल व तीन हजार रुपये नगद व आधार कार्ड लेकर चले गए।
एडीजी रेलवे सुष्मित विश्वास, आईजी अजयपाल लाम्बा के आदेशानुसार ट्रेनों एवं रेल्वे स्टेशनों पर इस ज्यादा नगदी एवं कीमती सामान ले जाने पर यात्रियो के साथ फ्रॉड, धोखाधडी, टटलूबाजी एवं बंगाल बिहार एवं लम्बी दूरी की ट्रेनो में जाने वाले यात्रियो को आरक्षण कन्फर्म करवाने का झांसा देकर उनके साथ फ्रॉड करने की वारदातो में अपराधियों की गिरफ्तारी एवं फॉड किये माल की बरामदगी के लिए जीआरपी अधीक्षक केवलराम, उपाधीक्षक हरिराम सोनी के सुपरविजन में जीआरपी निरीक्षक मुक्ता पारीक के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम में हैडकांस्टेबल मुन्नालाल, दीपेंद्रपाल सिंह, कांस्टेबल रिडमल एवं राजेंद्र को शामिल किया गया।
पुलिस पड़ताल में पता लगा कि इस प्रकार की घटना में गैंग के सदस्य अन्य राज्यों के रहने वाले होते है तथा स्टेशन पर समूह में नहीं रहकर आपस में अनजान बनकर यात्रियों के साथ टटलूबाजी की जाती है। घटना करने के बाद आरोपित अलग-अलग रास्तों से दिल्ली चले चले जाते है। इस प्रकार की धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों की तलाश के लिए ट्रेनों में विशेष गस्त एवं निगरानी रखी गई।
रेलवे पुलिस ने तीन आरोपिताें की पहचान पुष्पेन्द्र बसंतवानी निवासी दिल्ली, अपुजर आलम निवासी बिहार एवं मीठू सिंह निवासी पाली राजस्थान के रूप में की। आरोपिताें ने अपना जुर्म कबूल किया। इनके पास से सोने का एक टुकड़ा बरामद किया गया है। रेलवे न्यायालय में पेश कर जेल भिजवाया गया है।
गैंग के सदस्य स्वयं पुलिस, जीएसटी, रेल्वे विशेष विंग अधिकारी बन कर यात्रियों को नगदी, सोने के जेवरात एवं कीमती सामान बिना लाईसेंस के ट्रेवल नहीं किया जाकर अमाउण्ट कार्ड के साथ यात्रा करने का झांसा देकर धोखाधड़ी की जाती है।
गैंग के सदस्य रेलवे स्टेशनों, बस स्टेण्ड पर मुख्यत: एक राज्य से अन्य दूसरे राज्यों में रहकर नौकरी करने वाले, व्यापार करने वाले एवं मजदूरी करने वाले व्यक्तियो को टारगेट किया जाता है। गैंग के अलग अलग सदस्य स्टेशन पर बैठे व्यक्तियों से उनकी भाषा में बातें की जाकर जानकारी बढ़ाते है तथा बातों ही बातों में उनके पास नगदी, सोने के जेवरात एवं अन्य कीमती सामान की जानकारी ले लेते है। इस प्रकार यदि किसी व्यक्ति के पास ज्यादा नगदी, जैवरात या कीमती सामान होता है तो इसकी जानकारी अपने ग्रुप के सदस्यो को चोरी छुपे दी जाती है। गु्रप के सभी सदस्य आपस में अनजान बनकर टारगेट किये गये व्यक्ति के पास बैठ जाते है एवं एक व्यक्ति जो गैंग का लीडर होता है वह कही दूर बैठा रहता है और वह वहॉ आकर अमाउण्ट कार्ड बनाने के नाम पर धोखाधड़ी की जाकर उनके पास उपलब्ध नगदी, जेवरात एवं कीमती सामान लेकर रफूचक्कर हो जाते है।
प्रकरण में पीडि़त व्यक्ति बंगाल का रहने वाला है तथा जोधपुर में रहकर ज्वैलरी पर कारीगरी का कार्य करता है, जोधपुर में ज्वैलरी के कार्य से मजदूरी के रूप में प्राप्त सोने का बिस्किट का टुकडा लेकर अपने घर बंगाल जाने के लिए रेलवे स्टेशन जोधपुर पर आया। तब इस गैंग सदस्यों में से एक व्यक्ति द्वारा बंगाली भाषा में पीडि़त व्यक्ति से बातचीत की जाती है तथा उसके पास उपलब्ध सोने के बिस्किट टुकड़ें की जानकारी जुटाई गई। बाद में गैंग के सदस्य एक दूसरे का जानकारी दे देते। फिर पीडि़त के पास में अज्ञात शख्स पुलिस अधिकारी बनकर आया और अमाउण्ट कार्ड बनाने के लिए कहता। आरोपिताें ने पीडि़त को यह कहकर झांसे में लिया कि उक्त कथित पुलिस अधिकारी ने उनका कार्ड बनाया है जिससे उन्हें यात्रा में कोई दिक्कत नहीं हुई है। झांसे में पीडि़त ने फिर अपना कार्ड बनवाया था।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

