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फर्जी मैरिज कॉल सेंटर : एक वर्ष में 610 शिकार,17 साइबर स्लेव्ज,40 लाख का फ्रॉड

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फर्जी मैरिज कॉल सेंटर : एक वर्ष में 610 शिकार,17 साइबर स्लेव्ज,40 लाख का फ्रॉड


--मैनेजर गिरफ्तार, संचालक फरार, 30 कीपैड मोबाइल, 5 स्मार्ट फोन, 7 कम्प्यूटर व 30 रजिस्टर बरामद

झांसी, 23 अप्रैल (हि.स.)। शादी-विवाह कराने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया। थाना सीपरी बाजार और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने नंदनपुरा स्थित सरयू बिहार कॉलोनी में दबिश देकर कॉल सेंटर में काम कर रहीं 18-20 वर्ष की 16 युवतियों और एक मैनेजर को हिरासत में लिया है। जबकि संचालक महिला और उसका पुरुष साथी मौके से फरार हो गए।

गुरुवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में एएसपी अरीबा नोमान ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक किराए के मकान की ऊपरी मंजिल पर “शगुन मैरिज प्रोपराइटर” के नाम से कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां से लोगों को शादी का झांसा देकर ठगा जा रहा है। पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची तो फ्लैट में अलग-अलग केबिन बने हुए थे, जिनमें 17 युवतियां विभिन्न मोबाइल नंबरों से लोगों को कॉल कर रही थीं।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 7 कम्प्यूटर, 30 कीपैड मोबाइल फोन, 30 रजिस्टर, फोटो और अन्य दस्तावेज बरामद किए। मौके से थाना प्रेमनगर क्षेत्र निवासी हिना कौशर को गिरफ्तार किया गया, जो कॉल सेंटर की मैनेजर बताई जा रही है।

पूछताछ में हिना ने बताया कि कॉल सेंटर का संचालन शिवाजी नगर निवासी सतीश और उसकी महिला मित्र नीतू प्रजापति करते हैं। दोनों फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। पुलिस ने हिना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

जांच में सामने आया कि यह गिरोह एक वर्ष में 610 लोगों से ठगी कर करीब 30 से 40 लाख रुपये की ठगी कर चुकी है। लोगों को शादी का लालच देकर पहले 500 रुपये एंट्री फीस के नाम पर लिया जाता था फिर फोटो और वीडियो दिखाकर 30 से 40 हजार और कभी-कभी एक लाख रुपये तक ठग लेते थे। इसके बाद मोबाइल नंबर बदल दिए जाते थे।

--9 बैंक खाते सीज

पुलिस के अनुसार ठगी की रकम क्यूआर कोड के जरिए सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और कोटक बैंक के खातों में ली जाती थी। ऐसे 9 खाते और उनमें 50 हजार रुपये पुलिस ने फ्रीज कराए हैं। अब पुलिस इन बैंक खातों की गहन जांच कर रही है।

16 साईबर स्लेव्ज युवतियों का रेस्क्यू

प्रशिक्षु आईपीएस ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन में खास बात यह है कि 18 से 20 वर्ष की 16 साईबर स्लेव्ज युवतियों को रेस्क्यू किया गया है। इन्हें मजबूर कर 5 हजार की सैलरी पर यह काम कराया जाता था। हिरासत में ली गई सभी युवतियों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया