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झांसी : साइबर ठग गिरोह के आठ सदस्य गिरफ्तार

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झांसी : साइबर ठग गिरोह के आठ सदस्य गिरफ्तार


नौकरी का झांसा देकर 50 से अधिक लोगों को बनाये थे बंधक

गिरोह में नए लोगों को जोड़ने के लिए करते थे मजबूर,कंप्यूटर, मोबाइल फोन, नकदी, जाली दस्तावेज और अन्य अभिलेख बरामद

झांसी, 05 सितंबर (हि.स.)। नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवक-युवतियों और उनके परिजनों से लाखों रुपये ऐंठने के बाद उन्हें बंधक बनाकर गिरोह में नए लोगों को जोड़ने के लिए मजबूर करने वाले साइबर ठग गिरोह का झांसी पुलिस ने शनिवार काे पर्दाफाश किया है। बबीना थाना और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से बंधक बनाए गए 50 से अधिक महिला-पुरुषों को मुक्त कराया। मौके से कंप्यूटर, मोबाइल फोन, नकदी, जाली दस्तावेज और अन्य अभिलेख भी बरामद किए हैं।

पुलिस लाइन सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) विकास कुमार ने बताया कि पुलिस को पिछले कई दिनों से शिकायतें मिल रही थीं कि मैसर्स मां लक्ष्मी एसोसिएट के कार्यालय, कृष्णा कॉम्प्लेक्स, एल्डिको राजगढ़ मल्टी कंपनी सेंटोस में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को बुलाया जा रहा है। आरोप है कि पहले उनसे पैसे लिए जाते थे और बाद में उन्हें बंधक बनाकर गिरोह में अन्य लोगों को जोड़ने का काम कराया जाता था।

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी के निर्देशन में साइबर थाना, बबीना थाना और बरुआसागर थाना पुलिस की टीम ने मामले की जांच शुरू की। इसके बाद कार्यालय पर छापेमारी कर वहां बंधक बनाए गए 50 से अधिक महिला और पुरुषों को मुक्त कराया गया। पुलिस ने मौके से गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपिताें की पहचान राजस्थान के टोंक-नरौली सिसोली निवासी रामसिंह मीणा, लखन मेहता, बबलू, बिहार के धर्मपुरा निवासी आलोक, राजस्थान के देवली निवासी प्रयागराज, टोंक निवासी मोहित वर्मा, सुरेंद्र और नितेश के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपिताें के कब्जे से आठ मोबाइल फोन, 7,300 रुपये नकद, छह डायरियां, प्रमाण पत्र, कैशबुक और 20 रुपये के 500 से अधिक स्टांप बरामद किए हैं। बरामद दस्तावेजों और अन्य सामग्री की भी जांच की जा रही है।

एसएसपी ने पत्रकारों को बताया कि प्रारंभिक जांच में गिरोह के उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत कई राज्यों में सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। गिरोह कथित तौर पर चिटफंड कंपनी के रूप में पंजीकरण कराकर बेरोजगार युवक-युवतियों को नौकरी का लालच देता था। नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे बड़ी रकम वसूलने के बाद उन्हें गिरोह में नए लोगों को जोड़ने के लिए मजबूर किया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कोई अन्य व्यक्ति है, जिसकी भूमिका की जांच की जा रही है। विवेचना प्रभावित न हो, इसलिए फिलहाल उसका नाम गोपनीय रखा गया है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया