अंतरराष्ट्रीय किडनी माफिया का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार
कानपुर, 31 मार्च (हि.स.)। कानपुर में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। तीन अस्पतालों पर छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि यह नेटवर्क गरीब और मजबूर लोगों को निशाना बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर टेलीग्राम के जरिए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कर रहा था।
पुलिस आयुक्त ने मंगलवार को बताया कि गिरोह मरीज और डोनर को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया ग्रुप का इस्तेमाल करता था। पैसों के लालच और बीमारी की मजबूरी के बीच सौदे तय होते थे। पूरे नेटवर्क में डॉक्टर, दलाल और अन्य सहयोगी शामिल थे, जो बिना किसी वैध अनुमति के ऑपरेशन कर रहे थे। इसके अलावा, आरोपिताें ने डोनर और मरीजों की व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन साझा कर उन्हें फंसाया।
कल्याणपुर और रावतपुर स्थित अहूजा, प्रिया और मिड लाइफ अस्पतालों पर छापेमारी में करीब एक लाख पिचहत्तर हजार रुपये नकद और बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां बरामद की गईं। गिरफ्तार आरोपिताें में डॉ. प्रीति आहूजा और उनके पति डॉ. सुजीत सिंह आहूजा सहित छह लोग शामिल हैं। पुलिस का अनुमान है कि अब तक लगभग 50 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट इसी नेटवर्क के जरिए किए जा चुके हैं।
जांच में सामने आया कि किडनी देने वाला युवक आयुष बिहार का रहने वाला है और उत्तराखंड से एमबीए की पढ़ाई कर रहा था। मरीजों में नोएडा की पारुल और एक विदेशी महिला भी शामिल थीं। पुलिस को संदेह है कि रैकेट के तार बिहार, उत्तराखंड और साउथ अफ्रीका तक जुड़े हुए हैं। गिरोह ने पहले एक अस्पताल को सील होने के बाद भी दूसरे अस्पताल के जरिए अपना अवैध नेटवर्क फिर से सक्रिय कर लिया।पुलिस आयुक्त ने बताया कि शहर के कई नर्सिंग होम अब जांच के दायरे में हैं और पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल जारी है। आरोपितों के खिलाफ सख्त मुकदमा दर्ज किया गया है और अंतरराष्ट्रीय गिरोह के अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
किडनी तस्करी पर कड़ा कानून
भारतीय मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 क़ानून के अनुसार किडनी या किसी भी मानव अंग का लेन-देन केवल नज़दीकी रिश्तेदार या अधिकृत अनुमति के तहत ही वैध है। किसी भी प्रकार की खरीद-फरोख्त, अंगों की तस्करी या लालच में फंसाना सीधे मानवता के खिलाफ अपराध है।
कानून तोड़ने वालों के लिए यह पांच से 10 साल की कठोर कारावास की सज़ा और भारी जुर्माना सुनिश्चित करता है। यह क़ानून कोई कमज़ोर चेतावनी नहीं है। जो भी इसे तोड़ेगा, उसके खिलाफ राज्य पूरी ताक़त से कार्रवाई करेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

