तिरासी लाख के बीमा क्लेम के लिए रची मौत की साजिश, बीमार युवक के शव को लगाया करंट, हादसा दिखाने का आरोप
भीलवाड़ा, 09 मई (हि.स.)। भीलवाड़ा जिले में बीमा राशि हड़पने के लिए मानवता को शर्मसार कर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के मांडल उप जिला चिकित्सालय में लाए गए एक युवक के शव को देखकर डॉक्टरों को शक हुआ तो ऐसा खुलासा हुआ जिसने पुलिस को भी चाैंका दिया। आरोप है कि गुजरात से जुड़ा एक गिरोह गरीब और शराब की लत से पीड़ित लोगों के नाम पर भारी भरकम बीमा करवाकर उनकी मौत को हादसा दिखाने का खेल करता था।
मामला अहमदाबाद गुजरात निवासी 36 वर्षीय दीपक की मौत से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार दीपक लंबे समय से बीमार था और उसकी किडनी खराब हो चुकी थी। मृतक की मां चंपाबेन और बेटे दिव्यांशु ने आरोप लगाया कि कुछ लोग इलाज के बहाने उन्हें राजस्थान लेकर आए थे। रास्ते में दीपक की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपिताें ने मौत को करंट लगने से हुई दुर्घटना साबित करने की कोशिश की।
परिजनों के अनुसार आरोपिताें ने शव के पैर के अंगूठे और हाथ की उंगली को जलाया ताकि करंट लगने के निशान दिखाई दें। इतना ही नहीं, शरीर से खून निकालने के लिए छाती तक दबाई गई। देर रात शव को मांडल अस्पताल में छोड़ दिया गया और साथ आए लोग फरार हो गए।
मांडल अस्पताल के डॉ. रोहित सहरावत को शव देखते ही मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने पाया कि करंट के निशान सामान्य नहीं थे और शरीर पर ईसीजी इलेक्ट्रोड के निशान भी मौजूद थे। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
गांधीनगर थाना प्रभारी पुष्पा कासोटिया ने बताया कि मृतक के बेटे ने विशाल, सूरज, अर्जुन और भरत भाई नाम के लोगों की जानकारी दी। मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने गंगरार टोल नाके से चार लोगों को हिरासत में ले लिया।
जांच में सामने आया कि दीपक के नाम पर करीब 83 लाख रुपये के चार बीमा करवाए गए थे। परिवार को लालच दिया गया था कि मौत होने पर लाखों रुपये मिलेंगे। मृतक की मां ने आरोप लगाया कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर और शराब के आदी लोगों को निशाना बनाता था। उन्हें हर महीने शराब पीने के लिए पैसे दिए जाते थे और बीमा की किस्तें भी गिरोह के लोग भरते थे।
मृतक के बेटे ने दावा किया कि उनके गांव में करीब 71 लोगों का इसी तरह बीमा कराया गया है। पुलिस को आशंका है कि इस पूरे नेटवर्क में बीमा एजेंट, सर्वेयर और अन्य लोगों की भी मिलीभगत हो सकती है।
भीलवाड़ा एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल और बीमा दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में बड़ा गिरोह सक्रिय होने की आशंका सामने आई है। इधर, आर्थिक तंगी के कारण परिजन शव को गुजरात ले जाने में असमर्थ थे। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिसकर्मियों ने आर्थिक मदद कर शव भिजवाने की व्यवस्था करवाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद

