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भारतीय नम्बर के वाहनों को नेपाल में रखकर सीमा पर तस्करी का खेल

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भारतीय नम्बर के वाहनों को नेपाल में रखकर सीमा पर तस्करी का खेल


अररिया 28 अक्टूबर(हि.स.)।

जोगबनी के भारत नेपाल सीमा पर सक्रिय तस्कर नेपाली नंबर के वाहन के जगह अब तस्करी के लिए भारतीय नंबर के वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं।इसका खुलासा नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के द्वारा 17अक्टूबर 2026 को मुख्य सीमा पर जब्त की गई भारतीय नम्बर की वाहन के बाद हुआ है।

मोरंग शस्त्र पुलिस बल के एसपी गहेन्द्र भंडारी के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 की दोपहर नेपाल भारत सीमा के मटेरुवा सीमा पर नियमित गश्ति के दौरान सशस्त्र पुलिस के एक दल ने भारतीय नंबर प्लेट की एक हुंडई वेन्यू कार को संदिग्ध अवस्था में पाया।सुरक्षाकर्मियों ने जब रोकने का प्रयास किया तो चालक गाड़ी रोकने के बजाय भगा ले गया। चकमा देकर भागी बीआर 38 एपी 8286 नंबर की वह कार उसी दिन जोगबनी रानी विराटनगर सीमा के एक नंबर गेट के पास मिली। गाड़ी नेपाल की तरफ से ही सीमा शुल्क गेट की तरफ जा रही थी और चालक ऐसा नाटक कर रहा था मानो वह अभी भारत से नेपाल प्रवेश किया है।चालक सीमा शुल्क छूट पर्ची बनवाने के फिराक में था। सशस्त्र पुलिस ने तुरंत घेरकर गाड़ी को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया, लेकिन चालक गाड़ी की चाबी लेकर फरार हो गया।

गाड़ी कब्जे में लेने के बाद सीमा क्षेत्र मे अवैध कैरिंग और तस्करी में शामिल सुरेश कुमार यादव और शबनम खातुन ने उलटे सुरक्षाकर्मियों पर आरोप लगाया और विराटनगर के एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सशस्त्र पुलिस बल सीमा सुरक्षा गुल्म, रानी के डीएसपी सूर्यप्रकाश शर्मा और सशस्त्र पुलिस, मोरंग के एसपी गेहेन्द्र बहादुर भंडारी पर वैध रूप से सीमा शुल्क सुविधा लेकर चलाई जा रही गाड़ी को कब्जे में लेकर नौ दिनों तक परेशान करने का आरोप लगाया। लेकिन,आरोप निराधार निकला। भारत नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी 56वीं बटालियन की ओर से नेपाल पुलिस द्वारा मांगी गई सूचना उपरांत भेजे गए पत्र में जोगबनी स्थित बॉर्डर चेक पोस्ट से उक्त नंबर की गाड़ी के नेपाल प्रवेश नहीं होने की जानकारी दी गई।

एसएसबी का पत्र आने के बाद,मामले में अनुसंधान से जुड़े उच्च अधिकारियों का कहना है कि तस्करों की सीमा शुल्क विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत है। अधिकारियों के अनुसार, गाड़ी को नेपाल में ही छिपाकर रखने और सीमा शुल्क से केवल कागजी एंट्री कराने का पुराना तरीका ही इस्तेमाल किया जा रहा है। उस अधिकारी ने कहा,फिर नेपाल प्रवेश की छूट पर्ची मिलने के बाद वे भारत में एग्जिट किए बिना हर दिन छूट पर्ची कटाते हैं। गाड़ी कभी भारत नहीं जाती, गाड़ी नेपाल में ही रहती है।

मोरंग के सशस्त्र पुलिस प्रमुख गहेन्द्र बहादुर भंडारी ने बताया कि उस गाड़ी के भारत से नेपाल प्रवेश करने का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। उन्होंने कहा कि एसएसबी की एंट्री बुक में भी वह गाड़ी नहीं है। उसने हमें पुष्टि पत्र भी दिया है कि यह गाड़ी एंट्री नहीं हुई है। पुराने रिकॉर्ड में भी नहीं है। लेकिन उस दिन का हम कन्फर्मेशन लेटर ही लेकर आए हैं।

एसएसबी का आधिकारिक पत्र और सीसीटीवी फुटेज हाथ लगने के बाद सशस्त्र पुलिस ने नेपाल मे तकरीबन 70-80 लाख मूल्य की उस हुंडई कार का ताला तोड़कर विराटनगर सीमा शुल्क कार्यालय को सौंप दिया है। पुलिस ने बताया कि चालक द्वारा गाड़ी की चाबी छिपाए जाने के कारण ऐसा करना पड़ा। उन्होंने कहा,भारतीय सुरक्षा निकाय से पत्र प्राप्त होने के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर गाड़ी सीमा शुल्क में दाखिल कर दी गई है। अब आगे की जांच और कार्रवाई सीमा शुल्क विभाग द्वारा बढ़ाई जाएगी।

विराटनगर सीमा शुल्क कार्यालय के अधिकारी भीमराज आङदम्बे ने बताया कि मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी के छुट्टी से लौटने के बाद ही कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। जिला पुलिस कार्यालय मोरंग के एसपी कबित कटुवाल के अनुसार, मंगलवार को ही विराटनगर-4 नहरचौक से बीआर 11 पीए 4245 नंबर की स्कॉर्पियो को कब्जे में लिया गया है, जिसके चालक पुलिस को देखते ही भाग गए थे। वही विराटनगर-14 के ओम साह के घर से भी बीआर 11 डब्ल्यू 3307 नंबर की स्कॉर्पियो और बीआर 07एई 6584 नंबर की केटीएम ड्यूक मोटरसाइकिल बरामद की गई थी, जिसके कागजात अभी तक सीमा शुल्क कार्यालय में पेश नहीं हो सके हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर