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अनूपपुर : चेक बाउंस मामले में आरोपित को एक साल का सश्रम कारावास, 5.75 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश

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अनूपपुर : चेक बाउंस मामले में आरोपित को एक साल का सश्रम कारावास, 5.75 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश


अनूपपुर, 23 सितंबर (हि.स.)। अनूपपुर में भारतीय स्टेट बैंक की कलेक्ट्रेट एरिया शाखा की ओर से प्रस्तुत चेक अनादरण के मामले में न्यायालय ने आरोपित को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अनूपपुर की अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत दोषसिद्ध आरोपी अब्दुल आसिफ मंसूरी पुत्र अब्दुल कादिर मंसूरी, निवासी वार्ड क्रमांक 03, मस्जिद रोड, अनूपपुर को शेष 5 लाख 75 हजार 578 रुपये प्रतिकर के रूप में जमा करने का भी आदेश दिया है।

भारतीय स्टेट बैंक की ओर से इस प्रकरण में पैनल अधिवक्ता विजेन्द्र सोनी ने पैरवी की। अधिवक्ता सोनी ने बुधवार को बताया कि आरोपित द्वारा जारी चेक की राशि 4 लाख 81 हजार 426 रुपये थी। चेक अनादरण के बाद मामला न्यायालय में पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया।

उन्होंने बताया कि न्यायालय ने 7 दिसंबर 2023 से सितंबर 2026 तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की गणना करते हुए कुल 6 लाख 578 रुपये की राशि प्रतिकर के रूप में निर्धारित की। प्रकरण के लंबित रहने के दौरान आरोपित द्वारा 25 हजार रुपये जमा किए जा चुके थे। इस राशि को समायोजित करने के बाद अदालत ने आरोपी को शेष 5 लाख 75 हजार 578 रुपये प्रतिकर के रूप में अदा करने का निर्देश दिया है।

न्यायालय ने अपने निर्णय में चेक अनादरण और प्रतिकर से संबंधित मामलों में उच्चतम न्यायालय द्वारा समय-समय पर प्रतिपादित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रतिकर की निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किए जाने की स्थिति में आरोपित को कानून के अनुसार उसके परिणाम भुगतने होंगे।

इसके अतिरिक्त दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 359 के प्रावधानों के तहत आरोपी को 20 हजार 257 रुपये अभियोजन व्यय के रूप में भी अदा करने का आदेश दिया गया है। अभियोजन व्यय की राशि जमा नहीं करने पर आरोपी को 15 दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा।

अदालत के आदेश के बाद आरोपित को सुनाई गई सजा के संबंध में सजा वारंट तैयार कर जिला जेल भेजे जाने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने पूर्व में जारी जमानत एवं बंधपत्र संबंधी आदेशों को भी निरस्त कर दिया है।

मामले में बैंक की ओर से पैरवी करने वाले पैनल अधिवक्ता विजेन्द्र सोनी ने आम लोगों से अपने बैंकिंग और वित्तीय दायित्वों के प्रति गंभीर रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बैंक में जमा राशि केवल बैंक की संपत्ति नहीं होती, बल्कि इसमें आम लोगों की मेहनत की कमाई और पूरी वित्तीय व्यवस्था जुड़ी होती है। ऐसे में बैंक से लिया गया ऋण अथवा अन्य देय राशि समय पर चुकाना प्रत्येक ऋणी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि बैंक के धन का समय पर भुगतान नहीं होने से बैंकिंग व्यवस्था प्रभावित होती है और इसका असर उन लोगों पर भी पड़ता है, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई बैंकों में जमा कर रखी है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को ऋण, चेक और अन्य वित्तीय दायित्वों का समय पर निर्वहन करना चाहिए।

अधिवक्ता सोनी ने कहा कि चेक भुगतान का एक महत्वपूर्ण वित्तीय माध्यम है। चेक जारी करने वाले व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके बैंक खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध हो और जारी किया गया चेक समय पर भुगतान के लिए प्रस्तुत होने पर अनादरित न हो। उन्होंने कहा कि चेक अनादरण की स्थिति में कानून में स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान हैं।

उन्होंने आम नागरिकों से अपने बैंक खातों, ऋण और चेक भुगतान से जुड़े दायित्वों को गंभीरता से लेने तथा समय पर भुगतान करने की अपील की। उनका कहना है कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने से बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास मजबूत होता है और आम जनता के हितों की भी रक्षा होती है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला