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ऑनलाइन निवेश के नाम पर 2.66 करोड़ की ठगी, दो गिरफ्तार

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ऑनलाइन निवेश के नाम पर 2.66 करोड़ की ठगी, दो गिरफ्तार


कानपुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। ऑनलाइन निवेश के नाम पर दो करोड़ 66 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में साइबर अपराध थाना पुलिस ने शुक्रवार को दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में ठगी की रकम से जुड़े 89 बैंक खातों और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने आरोपितों के पास से 31 बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज, 22 एटीएम कार्ड, 27 चेकबुक, 19 पासबुक, पांच फर्मों की मुहरें और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान चकेरी के अहिरवां निवासी अखिल सिंह चौहान और सफीपुर सेकेंड कॉलोनी निवासी सतेन्द्र यादव उर्फ टोनी के रूप में हुई है। जाजमऊ निवासी मोहम्मद अहमद लारी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें ‘फिनसोल प्राइवेट लिमिटेड’ नाम के निवेश मंच के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। ‘अनन्या कुलकर्णी’ नाम से संपर्क करने वाले व्यक्ति ने व्हाट्सऐप के माध्यम से निवेश के लिए अलग-अलग चरणों में रकम जमा कराई। शिकायतकर्ता को मंच पर नौ करोड़ चौहत्तर लाख रुपये से अधिक का लाभ दिखाया गया। रकम निकालने का प्रयास करने पर उनसे कर, सत्यापन और निकासी शुल्क के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे गए। इस तरह उन्हें दो करोड़ छाछठ रुपये का नुकसान हुआ।

जांच के दौरान पुलिस को ‘सद्भावना सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया स्थित खाते में छह लेन-देन के जरिए तेरह लाख पचास हजार रुपये जमा होने का पता चला। खाते के संचालन में अखिल सिंह चौहान और सतेन्द्र यादव उर्फ टोनी की कथित भूमिका सामने आने पर दोनों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस बरामद दस्तावेजों और मोबाइल फोन की जांच कर रही है। मामले में विवेक रॉय नाम के व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि ठगी की रकम 89 बैंक खातों में भेजी गई थी। संबंधित खाते के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 38 शिकायतें मिली हैं। इनमें आठ मामलों में विभिन्न राज्यों में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी है। 19 शिकायतों की जांच में खाते से करीब 22 करोड़ रुपये का लेन-देन सामने आया है।

पुलिस के अनुसार, पांच और आठ अगस्त को संबंधित खातों से करीब तीन करोड़ चौबीस लाख रुपये का लेन-देन हुआ था। अब तक लगभग 30 लाख रुपये की रकम पर रोक लगाई जा चुकी है। गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला होने की आशंका है। पुलिस दूसरे स्तर के बैंक खातों, अन्य लाभार्थियों और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच कर रही है। साथ ही ऑनलाइन निवेश, एपीके फाइल और डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़े संभावित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप