फायरिंग कर आठ लाख लूटने वाले तीन गैंगस्टरों को पांच-पांच साल की सजा
बांदा, 14 सितंबर (हि.स.)। करीब 16 वर्ष पुराने फायरिंग कर आठ लाख रुपये लूटने के मामले से जुड़े गैंगस्टर एक्ट में उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में सोमवार को विशेष गैंगस्टर अदालत ने तीन आरोपियों को दोषसिद्ध करते हुए पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषसिद्ध पर छह-छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर प्रत्येक को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीपाल सिंह ने कपिल पुत्र हनुमान दास गुप्ता निवासी बन्योटा, थाना कोतवाली नगर, पुनीत पुत्र स्व. माता प्रसाद निवासी डीएवी कॉलेज के पास बारी मोहल्ला और मन्नू उर्फ महमूद उल्ला पुत्र स्व. महबूब निवासी हाथीखाना अलीगंज, थाना कोतवाली नगर को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम की धारा-3 के तहत दोषसिद्ध किया। फैसला सुनाए जाने के बाद तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार भेज दिया गया।
अभियोजन के अनुसार पांच जनवरी 2010 की रात करीब 10 बजे हरपाल सिंह आहूजा मकान के सौदे के आठ लाख रुपये लेकर कार संख्या यूपी-90 ई-7925 से घर लौट रहे थे। उनके साथ चालक समी सरदार भी था। घर के पास पहुंचते ही मोटरसाइकिल सवार तीन बदमाशों ने कार रोककर फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से समी सरदार के दाहिने हाथ में चोट आई। इसके बाद बदमाश कार में रखी आठ लाख रुपये की रकम से भरी प्लास्टिक की बोरी लेकर फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने घायल चालक को अस्पताल पहुंचाया और मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान अभियोजन के अनुसार लूटी गई रकम में से तीन लाख रुपये कपिल की दुकान से बरामद किए गए। पुलिस ने आरोपियों के आपराधिक इतिहास, आधारभूत मुकदमे, गैंगचार्ट, एफआईआर, जीडी, अभियोजन स्वीकृति समेत अन्य अभिलेख जुटाकर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से गैंगचार्ट, एफआईआर, जीडी कायमीनामा, आरोपपत्र, अभियोजन स्वीकृति और आधारभूत मुकदमे से संबंधित दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। अभियोजन ने तर्क दिया कि आरोपी संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे और अपराधों के जरिए आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करते थे।
बचाव पक्ष ने आरोपियों को निर्दोष बताते हुए अभियोजन के साक्ष्यों और गैंगचार्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन कपिल, पुनीत और मन्नू उर्फ महमूद उल्ला के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का अपराध संदेह से परे साबित करने में सफल रहा।
मामले में प्रारंभ में पांच अभियुक्तों का उल्लेख था। न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के कारण रफत उल्ला और श्रीमती जैनब की पत्रावलियां पूर्व में अलग कर दी गई थीं। वर्तमान निर्णय कपिल, पुनीत और मन्नू उर्फ महमूद उल्ला के विरुद्ध विचारण से संबंधित है।
अदालत ने तीनों के सजायावी वारंट तैयार कर तत्काल जिला कारागार भेजने के निर्देश दिए। पूर्व में बिताई गई अभिरक्षा की अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित करने का भी आदेश दिया गया। उक्त जानकारी विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह

