home page

पहले प्रेम विवाह, फिर पत्नी की हत्या, अब पति को आजीवन कारावास एवं जुर्माना

 | 

पन्ना, 17 मार्च (हि.स.)। मप्र के पन्ना जिले में बहुचर्चित और सनसनीखेज हत्या प्रकरण में न्यायालय ने आरोपी पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रोहित गुप्ता ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला मृतिका लक्ष्मी बाई प्रजापति की हत्या से जुड़ा है, जिसमें न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कड़ा फैसला सुनाया।

मृतिका के भाई धन्नू प्रजापति ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उसकी मंझली बहन लक्ष्मी बाई प्रजापति ने लगभग चार वर्ष पहले अपनी मर्जी से पवई निवासी अन्नू उर्फ अरूण कुमार विश्वकर्मा से कोर्ट मैरिज की थी। विवाह के बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में वार्ड क्रमांक 15, एडीजे आवास के पास रहने लगे थे। उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें एक पुत्र और दो पुत्रियां शामिल हैं।

धन्नू प्रजापति ने अपने बयान में यह भी बताया कि वह ढाबे के काम से अक्सर उस रास्ते से गुजरता था, जिससे बहन के घर के पास से आना-जाना होता था। इस दौरान उसने कई बार दोनों के बीच विवाद और झगड़े होते देखे थे। उसने आरोप लगाया कि अरूण विश्वकर्मा अक्सर उसकी बहन के साथ मारपीट करता था।

घटना 23 जून 2023 की है, जब दोपहर में धन्नू अपनी बहन से मिला था। उसी दिन रात करीब आठ बजे उसके छोटे भाई ने बताया कि बहन के घर से चिल्लाने की आवाज आ रही थी और आरोपी अरूण उसे डंडे से पीट रहा था। इसके कुछ समय बाद आरोपी स्वयं धन्नू के पास पहुंचा और बताया कि लक्ष्मी की तबीयत खराब है और घर चलने को कहा, लेकिन उसने इसे सामान्य विवाद समझकर जाने से मना कर दिया। बाद में रात करीब 11 बजे जब ढाबा मालिक ने उसे सूचना दी कि उसकी बहन की हालत गंभीर है, तब वह मौके पर पहुंचा। वहां जाकर देखा कि लक्ष्मी बाई घर के कमरे में जमीन पर पड़ी हुई थी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत विवेचना की और पर्याप्त साक्ष्य जुटाए। इसके बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। शासन द्वारा इस प्रकरण को चिन्हित कर सनसनीखेज मामलों की श्रेणी में रखा गया था। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (अत्याचार निवारण अधिनियम) प्रदीप कुशवाह की अदालत में हुई।

शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीराम यादव ने पैरवी की। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और तर्कों से सहमति जताते हुए आरोपी अन्नू उर्फ अरूण विश्वकर्मा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा, साक्ष्य छिपाने के अपराध में धारा 201 के तहत आरोपी को तीन वर्ष के कठोर कारावास और 500 रुपये के अतिरिक्त अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश पांडे