home page

जबलपुर : परीक्षण में अमानक पाये जाने पर पाटन थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर, नकली डीएपी का मामला

 | 
जबलपुर : परीक्षण में अमानक पाये जाने पर पाटन थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर, नकली डीएपी का मामला


जबलपुर, 13 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के विकासखंड पाटन के ग्राम गाड़ाघाट में कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा गत दिनों नकली होने की आशंका पर जब्त की गई डीएपी खाद की विश्लेषण रिपोर्ट प्राप्त हो जाने के बाद कृषि विभाग की ओर से सोमवार को पाटन थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।

अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने धनेटा के एक जागरूक किसान से मिली सूचना पर तीन जुलाई को छापामार कार्यवाही कर ग्राम गाडाघाट में नकली डीएपी की 22 बोरियां जब्त की थी।

नकली डीएपी खाद इफ्को कंपनी की बोरियों में भरकर रखी गई थीं। जब्त की गई खाद के सेम्पल परीक्षण हेतु उर्वरक जांच प्रयोग शाला भेजे गये थे।

अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा लगातार चलाये जा रहे प्रचार-प्रसार अभियान से जागरूक होकर ग्राम धनेटा के एक किसान ने नकली उर्वरक की पहचान कर ग्राम इसकी सूचना एसडीएम पाटन मानवेन्द्र सिंह को दी थी।

किसान से सूचना प्राप्त होते ही एसडीएम पाटन के निर्देश पर नायब तहसीलदार रश्मि चौधरी एवं पटवारी सत्येन्द्र चौरसिया तुरंत जांच के लिए ग्राम गाड़ाघाट पहुंचे। वहां अवैध नकली डीएपी पाए जाने पर अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ इंदिरा त्रिपाठी को सूचित किया गया।

इसके बाद अनुविभागीय कृषि अधिकारी के निर्देशों का पालन करते हुए उर्वरक निरीक्षक पाटन पंकज कुमार श्रीवास्तव एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पाटन श्रीमती सीमा राउत की टीम ने तत्काल गाड़ाघाट में प्रकाश बर्मन पिता दयाशंकर बर्मन के घर पर छापामार कार्रवाई की।

कार्रवाई के दौरान प्रकाश बर्मन के घर से इफको कंपनी के नाम की 22 बोरी अवैध नकली डीएपी रखी पाई गई। टीम द्वारा मौके पर ही स्थल पंचनामा और जब्ती की कार्रवाई की गई।

जब्त की गई सभी 22 बोरियों को थाना प्रभारी पाटन के सब इंस्पेक्टर आकाशदीप साहू के सुपुर्द कर थाना पाटन में जमा कराया गया है।

इफ्को कंपनी के उप प्रबंधक ने थाना पहुचकर बोरी का निरीक्षण कर अपने लिखित प्रतिवेदन में बताया की पायी गई डीएपी की बोरी की सिलाई सफेद रंग के धागे से है, जबकि इफ्को द्वारा हरे रंग का धागा उपयोग किया जाता है। इससे यह प्रतीत होता है की यह डीएपी के बैग इफ्को कंपनी के नहीं है ।

उर्वरक निरीक्षक पंकज कुमार श्रीवास्तव द्वारा पाई गई डीएपी की बोरियों से नमूने लेकर उर्वरक जांच प्रयोगशाला में भेजा गया था।

परीक्षण में नाइट्रोजन 0.5 प्रतिशत एवं फास्पोरस 0.5 प्रतिशत पाया गया, जबकि डीएपी खाद में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन एवं 46 प्रतिशत फास्पोरस होता है।

इस मामले में आरोपी प्रकाश बर्मन के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा 7 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 का उल्लंघन पाया गया। प्रकरण में उर्वरक निरीक्षक पाटन पंकज श्रीवास्तव द्वारा थाना पाटन में एफ आईआर दर्ज कराई गई ।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक