सीहोर में पट्टे के विवाद में किसान की हत्या, लाठी-तलवारों से घर में घुसकर हमला
भोपाल, 28 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की भेरूंदा तहसील के एक गांव में जमीन के पट्टे की लिखा-पढ़ी को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक घटना में बदल गया। मंगलवार रात घर में खाना खा रहे 50 वर्षीय किसान रामद्वार मेहर पर कथित तौर पर लाठी-डंडों और तलवारों से हमला कर दिया गया। उन्हें बचाने पहुंचे परिजनों के साथ भी मारपीट की गई। गंभीर रूप से घायल किसान ने बुधवार सुबह भोपाल के हमीदिया अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। घटना में उनके बेटे, चार साल की पोती और परिवार के अन्य सदस्य भी घायल हुए हैं। परिजनों ने लाड़कुई पुलिस चौकी पर सूचना देने के बावजूद समय पर सहायता नहीं मिलने का आरोप लगाया है।
परिजनों के मुताबिक, मंगलवार रात रामद्वार मेहर पुत्र बलराम प्रसाद घर में खाना खा रहे थे। इसी दौरान संतोष, उसका बेटा रितेश, बलराम, दुर्गेश सहित अन्य लोग वहां पहुंचे। आरोप है कि सभी लाठी-डंडों और तलवारों से लैस थे। उन्होंने घर में घुसकर रामद्वार पर हमला कर दिया। उन्हें बचाने आए परिवार के सदस्यों के साथ भी मारपीट की गई। इस दौरान घर में तोड़फोड़ किए जाने का भी आरोप है। हमले में रामद्वार के सिर में गंभीर चोट आई थी। उन्हें उपचार के लिए भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई।
मृतक के बेटे अरुण के अनुसार, गांव में जमीन के पट्टे बनाने की प्रक्रिया चल रही है। 26 अक्टूबर को पटवारी गांव आया था। इस दौरान उनकी जमीन के पट्टे से संबंधित लिखा-पढ़ी की जा रही थी। अरुण का आरोप है कि इसी दौरान संतोष ने धक्का लगने की बात को लेकर विवाद शुरू कर दिया। अरुण के मुताबिक, उन्होंने विवाद बढ़ाने के बजाय वहां से जाना उचित समझा। बाद में उन्होंने अपने पिता को घटना के बारे में बताया। उनके पिता ने संतोष को समझाया था। परिजनों का आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर आरोपितों ने मंगलवार रात उनके घर पर हमला कर दिया। हालांकि, विवाद के वास्तविक कारण और हमले की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिजनों के अनुसार, हमले में अरुण का कान कट गया, जबकि उनकी चार साल की बेटी के पैर में फ्रैक्चर हुआ है। मृतक की पत्नी और बेटी को भी चोटें आई हैं। घायल परिजनों का उपचार कराया जा रहा है। किसान की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है।
घटना के बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। अरुण का आरोप है कि हमले के दौरान वह मदद मांगने लाड़कुई पुलिस चौकी पहुंचे थे। उस समय हमलावर उनके घर में तोड़फोड़ कर रहे थे। उनके मुताबिक, चौकी पर करीब पांच पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन मौके पर सहायता भेजने के बजाय उन्हें भेरूंदा थाने जाकर शिकायत करने के लिए कहा गया।
परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस सहायता मिलती तो स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि, पुलिस चौकी को सूचना दिए जाने और कथित तौर पर कार्रवाई में देरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

