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धार में फर्जी शादी का सनसनीखेज खुलासा: 8 दिन बाद दुल्हन गायब, 4.25 लाख की ठगी

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धार , 28 फ़रवरी (हि.स.)।मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश के धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र में शादी के नाम पर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि सुनियोजित तरीके से फर्जी विवाह रचाकर युवक से 4 लाख 25 हजार रुपये ऐंठ लिए गए और शादी के महज आठ दिन बाद दुल्हन अचानक गायब हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।

जिला पुलिस नियंत्रण कक्ष से शनिवार को जारी एफआईआर के अनुसार, फरियादी उमेश मदारिया निवासी राजोद की लंबे समय से शादी नहीं हो पा रही थी। इसी बीच उसकी मुलाकात उमेश मारू निवासी ग्राम बरमंडल, तहसील सरदारपुर से हुई। मारू ने भरोसा दिलाया कि वह उसकी शादी तय करा देगा। विश्वास में आकर फरियादी ने हामी भर दी।

आरोप है कि उमेश मारू ने एक युवती से मुलाकात करवाई और विवाह तय कराने के नाम पर किश्तों में करीब चार लाख रुपये ले लिए। 16 जनवरी 2026 को खरगोन में शपथ पत्र तैयार कराया गया। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाज से चिंतामन गणेश मंदिर में विवाह संपन्न कराया गया। शादी के बाद युवती अनिता पांड्या पत्नी बनकर फरियादी के घर राजोद में रहने लगी।

बताया जा रहा है कि विवाह के बाद लगभग आठ दिनों तक अनिता ने पति के साथ वैवाहिक जीवन व्यतीत किया, जिससे किसी को भी शक नहीं हुआ। लेकिन आठवें दिन घटनाक्रम ने नाटकीय मोड़ ले लिया। भूरीबाई पांड्या और रवि बरोर नामक दो लोग फरियादी के घर पहुंचे। उन्होंने पगफेरे की रस्म का हवाला देते हुए अनिता को अपने साथ ले जाने की बात कही। परिवार ने सामाजिक परंपरा समझकर अनुमति दे दी।

इसके बाद से ही अनिता वापस नहीं लौटी। फरियादी ने जब संपर्क करने की कोशिश की तो सभी आरोपितों के मोबाइल बंद मिले। कई दिनों तक इंतजार और तलाश के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला तो उमेश मदारिया ने राजोद थाने में शिकायत दर्ज कराई। फरियादी ने अनिता पांड्या, उसकी माता भूरीबाई पांड्या, रवि बरोर और उमेश मारू इन चारों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

राजोद थाना के उप निरीक्षक मानसिंह सिंगार के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला सुनियोजित ठगी का प्रतीत हो रहा है। पुलिस सभी आरोपितों की तलाश में जुट गई है और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह कोई संगठित गिरोह हो सकता है, जो शादी का झांसा देकर अविवाहित युवकों को निशाना बनाता है।

उल्‍लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह को लेकर सामाजिक दबाव और भावनात्मक संवेदनशीलता का फायदा उठाकर इस तरह की वारदातें सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय में कानूनी सत्यापन, परिवार की पृष्ठभूमि की जांच और आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि बेहद जरूरी है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि आरोपितों का पता लगाने के लिए तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स का विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों ने विश्वास दिलाया है कि इस झूठी शादी के पूरे नेटवर्क का जल्द पर्दाफाश किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / Gyanendra Tripathi