उज्जैन में अस्पताल प्रबंधन पर परिजनों ने लगाया बच्चा बदलने का आरोप
उज्जैन, 16 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में फ्रीगंज स्थित लोटस अस्पताल में एक नवजात को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परिवार ने आरोप लगाया है कि प्रसव के बाद उन्हें बेटे के जन्म की सूचना दी गई थी, लेकिन बाद में अस्पताल से बच्ची होने की जानकारी दी गई। मामले ने तूल पकड़ा तो मौके पर जांच के लिए पुलिस पहुंची।
जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम को ग्राम लिम्बोदा निवासी सुनील कहार की पत्नी पायल की डिलीवरी तिवारी नर्सिंग होम में हुई थी। परिजनों का कहना है कि प्रसव के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने उन्हें पुत्र जन्म होने की जानकारी दी थी। जन्म के कुछ समय बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई। जिसके चलते उसे उपचार के लिए रात 8 बजे नवजात को फ्रीगंज स्थित लोटस अस्पताल रैफर किया गया, जहां उसका इलाज शुरू हुआ। मंगलवार सुबह जब परिजनों ने नवजात की स्थिति के बारे में जानकारी ली, तो उन्हें बताया गया कि बालिका का उपचार चल रहा है। बालिका की जानकारी के बाद परिजनों ने आपत्ति दर्ज कराई और पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए।
पुलिस ने की दस्तावेजों की जांचसूचना मिलते ही महिला के परिजन अस्पताल पहुंचे और प्रबंधन पर बच्चा बदलने का गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना मिलते ही माधवनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। लोटस अस्पताल के मैनेजर अनिरुद्ध ने पुलिस को कहा कि तिवारी नर्सिंग होम से इलाज के लिए जिस नवजात को भेजा गया था, वह बालिका ही थी। भर्ती से लेकर उपचार तक की पूरी जानकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में सुरक्षित है।
अपने दावे पर अड़े रहे परिजनलोटस अस्पताल प्रबंधन और तिवारी नर्सिंग होम प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि डिलीवरी के दौरान मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ से जानकारी ली गई है। सभी के अनुसार महिला ने बच्ची को जन्म दिया था। प्रबंधन का दावा है कि मेडिकल दस्तावेज, रेफरल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज भी यही बता रहे है। लेकिन महिला और उसके परिजन अपने दावे पर अड़े रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अस्पतालों के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित कर्मचारियों के बयान जुटा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल

