शादी कराने का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाला फर्जी मैरिज ब्यूरो संचालक गिरफ्तार
कानपुर, 17 जून (हि.स.)। सोशल मीडिया और फर्जी मैट्रिमोनियल वेबसाइटों के जरिए शादी कराने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने बुधवार को गिरोह के सरगना रंजीश कुमार गौड़ को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि गिरोह ने करीब एक हजार लोगों को अपना शिकार बनाया। मामले का खुलासा तब हुआ जब बाराबंकी निवासी एक मजदूर ने शादी कराने के नाम पर चार लाख रुपये की ठगी की शिकायत पुलिस कमिश्नर से की।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र निवासी चंद्रेश ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उससे शादी कराने के नाम पर किस्तों में चार लाख रुपये वसूल लिए गए, लेकिन विवाह नहीं कराया गया। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल को जांच सौंपी गई। जांच के दौरान जिन मोबाइल नंबरों से पीड़ित से संपर्क किया गया था, उनकी लोकेशन कानपुर में एक ही क्षेत्र में मिली। इसके आधार पर क्राइम ब्रांच ने कर्रही रोड, गौशाला और यशोदा नगर स्थित तीन कार्यालयों में एक साथ छापेमारी की।
छापेमारी में तीनों केंद्रों पर 23 युवतियां टेली कॉलर के रूप में काम करती मिलीं। पुलिस ने मुख्य आरोपित रंजीश कुमार गौड़ को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि वह मूल रूप से छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है और पहले एक वैध मैट्रिमोनियल कंपनी में काम कर चुका है। वहीं से उसने इस कारोबार की कार्यप्रणाली सीखी और बाद में खुद की वेबसाइटें शुरू कर दीं।
जांच में पता चला कि आरोपित ने अलग-अलग नामों से मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म बनाकर उन्हें बाकायदा पंजीकृत कराया था। सोशल मीडिया पर शादी संबंधी आकर्षक विज्ञापन चलाकर अविवाहित पुरुषों का डाटा जुटाया जाता था। इसके बाद टेली कॉलर उनसे संपर्क कर स्वयं को मैरिज काउंसलर या रिलेशनशिप एडवाइजर बताती थीं। पीड़ितों की आर्थिक स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि जानने के बाद उन्हें अलग-अलग पैकेज बेचे जाते थे।
पुलिस के अनुसार गिरोह एआई तकनीक से तैयार की गई महिलाओं की आकर्षक तस्वीरें भेजकर लोगों का विश्वास जीतता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल निर्माण, मैचिंग, दस्तावेज सत्यापन, सुरक्षा जमा और अन्य शुल्कों के नाम पर लगातार रकम वसूली जाती थी। कई मामलों में युवतियां काल्पनिक पहचान के साथ सीधे पीड़ितों से बातचीत भी करती थीं, जिससे उन्हें विवाह की प्रक्रिया वास्तविक लगती थी।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी से जुड़े 11 बैंक खाते मिले। इनमें से चार खातों में करीब 41 लाख रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। इन खातों के संबंध में राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज मिली हैं। पुलिस को संदेह है कि ठगी का वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।
पूछताछ में छत्तीसगढ़ निवासी अमित, करम पटेल और जागृति नामक लोगों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार अमित कानूनी मामलों में गिरोह की मदद करता था, जबकि अन्य सहयोगी अलग-अलग स्थानों से इसी तरह के मैरिज ब्यूरो संचालित कर रहे थे। तीनों की तलाश में पुलिस टीमों को लगाया गया है।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 43 कीपैड मोबाइल फोन, 13 स्मार्टफोन, तीन कंप्यूटर, कई रजिस्टर, चेकबुक, एटीएम कार्ड, क्यूआर कोड, राउटर, ब्रॉडबैंड उपकरण और प्रचार सामग्री बरामद की है। बरामद दस्तावेजों में ग्राहकों से वसूली गई रकम और लेनदेन का पूरा विवरण दर्ज मिला है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है। बैंक खातों, डिजिटल उपकरणों और कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है। संभावना है कि जांच आगे बढ़ने पर ठगी के और भी मामलों का खुलासा हो सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

