फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट से डॉक्टर बने तीन और गिरफ्तार
जयपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। विदेश से एमबीबीएस करने के बाद फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) में असफल रहने के बावजूद फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए राजस्थान में इंटर्नशिप और चिकित्सा प्रैक्टिस करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने दलालों के जरिए फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र हासिल किए और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में पंजीकरण अथवा उससे संबंधित प्रक्रिया का लाभ उठाकर विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की। एक आरोपी बिना आरएमसी पंजीकरण के अस्पताल में मरीजों का इलाज करता मिला।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एसओजी) विशाल बंसल के अनुसार, मामले की जांच में अब तक 100 से अधिक संदिग्धों को चिह्नित किया जा चुका है। एसओजी के उप महानिरीक्षक भुवन भूषण यादव के नेतृत्व और पुलिस उप अधीक्षक जितेंद्र नावरिया के निर्देशन में जांच चल रही है। प्रकरण में आरएमसी के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली सहित दलालों समेत अब तक 30 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
गिरफ्तार आशीष कुमार (30), डीग निवासी—आरोपी ने कजाकिस्तान से वर्ष 2021 में एमबीबीएस किया। भारत लौटने के बाद तीन बार एफएमजीई परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद शुभम गुर्जर के माध्यम से 25 लाख रुपए देकर फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र बनवाया। इसी के आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज, करौली से इंटर्नशिप पूरी की।
राजेन्द्र कुमार यादव (39), मुरलीपुरा जयपुर निवासी—राजेन्द्र ने चीन से वर्ष 2006 से 2012 के बीच एफएमजीई की पढ़ाई की। वह आठ बार एफएमजीई परीक्षा में शामिल हुआ, लेकिन उत्तीर्ण नहीं हो सका। इसके बाद संदीप नामक व्यक्ति को 29 लाख रुपए देकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया और आरएमसी में पंजीकरण के लिए आवेदन किया। पुलिस के अनुसार, वह वर्तमान में मुरलीपुरा स्थित अपनी पत्नी के श्री नारायण अस्पताल का प्रबंधन संभाल रहा था।
नरेश रोलानिया (26), कोटपूतली-बहरोड़ निवासी—कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने के बाद तीन बार एफएमजीई परीक्षा में असफल रहा। इसके बाद रिश्तेदार के माध्यम से 26 लाख रुपए में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया और उदयपुर मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप की। पुलिस के अनुसार, नरेश बिना एफएमजीई परीक्षा पास किए और बिना आरएमसी पंजीकरण के कोटपूतली स्थित पल्स अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज कर रहा था।
एसओजी के पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया ने बताया कि तीनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जयपुर महानगर द्वितीय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने आरोपियों को 14 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेजा है। एसओजी आरोपियों से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने वाले नेटवर्क, दलालों से संपर्क, लेन-देन और अन्य संदिग्ध फर्जी डॉक्टरों के संबंध में पूछताछ कर रही है। जांच में सामने आए अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

