फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र से इंटर्नशिप और पंजीयन कराने के आरोप में चार और गिरफ्तार
जयपुर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। विदेश से एमबीबीएस करने के बाद फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) की स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर इंटर्नशिप करने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में पंजीयन कराने के मामले में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में डीग जिले के भारत भूषण शर्मा और शिवम चौधरी तथा भरतपुर जिले के सौरव शर्मा और हिमांशु शर्मा शामिल हैं। एसओजी के अनुसार, आरोपी विदेश से एमबीबीएस करने के बाद निर्धारित परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे। इसके बाद उन्होंने दलालों के माध्यम से 27 से 30 लाख रुपए तक देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए और इनके आधार पर राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि मामले की जांच के दौरान अब तक 100 से अधिक विदेशी मेडिकल स्नातकों को चिह्नित किया जा चुका है। इनमें ऐसे अभ्यर्थी शामिल हैं, जिन पर परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर इंटर्नशिप या पंजीयन कराने का संदेह है। आरएमसी के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा सहित 33 आरोपियों की पहले गिरफ्तारी हो चुकी थी। अब चार और गिरफ्तारियों के बाद कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 37 हो गई है।
परीक्षा में असफल, दलालों से बनवाए प्रमाणपत्र
एसओजी की जांच के अनुसार विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद भारत में चिकित्सा कार्य करने के लिए निर्धारित एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है। आरोप है कि परीक्षा में सफल नहीं होने वाले अभ्यर्थियों ने दलालों के माध्यम से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करवाए। इसके बाद राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की और आरएमसी में अस्थायी पंजीयन के लिए आवेदन किया। मामले में मेडिकल काउंसिल के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।
भारत भूषण शर्मा: 30 लाख रुपए देकर बनवाया प्रमाणपत्र
डीग में पुराने बस स्टैंड के पास दाऊजी के मंदिर क्षेत्र निवासी भारत भूषण शर्मा (26) ने वर्ष 2022 में किर्गिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। एसओजी के अनुसार, एफएमजीई परीक्षा कई बार देने के बावजूद सफल नहीं होने पर उसने दौसा निवासी शुभम गुर्जर के माध्यम से 30 लाख रुपए देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया। इसके आधार पर उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा में इंटर्नशिप की। शुभम गुर्जर इस मामले में पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
सौरव शर्मा: रूस से की पढ़ाई, 27 लाख रुपए दिए
भरतपुर जिले के वैर में सीतारामजी के मंदिर के पास रहने वाले सौरव शर्मा (29) ने वर्ष 2017 से 2023 तक रूस में एमबीबीएस की पढ़ाई की और 2023 में भारत लौटा। आरोप है कि एफएमजीई परीक्षा में सफल नहीं होने पर उसने वैर निवासी गजेन्द्र के माध्यम से 27 लाख रुपए देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया। इसके आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज, धौलपुर में इंटर्नशिप की और आरएमसी में पंजीयन के लिए आवेदन किया।
हिमांशु शर्मा: रिश्तेदार के साथ कराया फर्जी प्रमाणपत्र
भरतपुर जिले के हलैना में गांधी चौक के पास रहने वाले हिमांशु शर्मा (26) ने भी वर्ष 2017 से 2023 तक रूस में एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। वह सौरव शर्मा का मामा-बुआ का बेटा है। एसओजी के अनुसार, एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर पाने पर उसने भी गजेन्द्र के माध्यम से 27 लाख रुपए देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया। इसके आधार पर महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, जयपुर में इंटर्नशिप की और आरएमसी में पंजीयन के लिए आवेदन किया।
शिवम चौधरी: कजाकिस्तान में की थी एमबीबीएस
डीग जिले के पहाड़ी निवासी शिवम चौधरी (28) ने वर्ष 2016 से 2021 तक कजाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई की और 2021 में भारत लौटा। जांच के अनुसार परीक्षा में सफल नहीं होने पर उसने कजाकिस्तान में छात्रावास चलाने वाले और भारतीय विद्यार्थियों को विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई कराने का काम करने वाले दलाल गजेन्द्र के माध्यम से 30 लाख रुपए देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया। इसके आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज, अलवर में इंटर्नशिप की और आरएमसी में पंजीयन के लिए आवेदन किया।
प्रति अभ्यर्थी 20 से 30 लाख रुपए लेने का आरोप
एसओजी पुलिस अधीक्षक सतनाम सिंह के अनुसार, गिरोह के कथित सरगना भानाराम माली और उसके सहयोगियों शुभम गुर्जर, इंद्रराज गुर्जर सहित अन्य दलालों पर विदेश से एमबीबीएस कर लौटे अभ्यर्थियों से फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने और आरएमसी में पंजीयन कराने के नाम पर प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपए तक वसूलने का आरोप है। एसओजी इस नेटवर्क में प्रमाणपत्र तैयार करने वालों, दलालों और पंजीयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की पड़ताल कर रही है।
आरएमसी के पूर्व रजिस्ट्रार सहित अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार
इस प्रकरण में पहले राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, कथित मुख्य आरोपी भानाराम माली और अन्य दलालों सहित विदेश से एमबीबीएस करने वाले अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसओजी के अनुसार, फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर अस्थायी पंजीयन और इंटर्नशिप हासिल करने के मामले में मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
एसओजी थाना जयपुर में इस संबंध में 4 फरवरी 2026 को प्रकरण दर्ज किया गया था। एसओजी की टीम गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पंजीयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

