फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश, 59 प्रमाणपत्र और साढ़े चार लाख रुपये के साथ दो गिरफ्तार
कानपुर, 03 जुलाई (हि.स.)। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और बोर्डों की फर्जी मार्कशीट, डिग्री और अन्य शैक्षिक प्रमाणपत्र तैयार कर बेचने वाले संगठित गिरोह का एसआईटी और फीलखाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 59 फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र, चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा अपराध से अर्जित 4.53 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार गिरोह कई वर्षों से देशभर में फर्जी दस्तावेज तैयार कर मोटी रकम वसूल रहा था।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने शुक्रवार काे बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अमित कुमार सक्सेना निवासी बर्रा तथा गोपाल निवासी विनायकपुर के रूप में हुई है। मुखबिर की सूचना पर दोनों को गिरोह के ठिकाने से दबोचा गया। अमित के कब्जे से 26 फर्जी मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन और प्रोविजनल सर्टिफिकेट, दो मोबाइल फोन तथा 4.53 लाख रुपये नकद बरामद हुए, जबकि गोपाल के पास से 33 फर्जी दस्तावेज और दो मोबाइल फोन मिले।
पुलिस के मुताबिक बरामद फर्जी दस्तावेज देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के नाम से तैयार किए गए थे। पूछताछ में दोनों आरोपितों ने बताया कि वे करीब सात वर्षों से इस धंधे में शामिल हैं, जबकि गिरोह का सरगना अखिलेश शुक्ला और उसका भाई निखिलेश शुक्ला करीब दस वर्षों से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। पुलिस का दावा है कि अखिलेश शुक्ला दिसंबर 2025 में लखनऊ के गोमतीनगर थाना क्षेत्र में दर्ज फर्जी डिग्री मामले में जेल गया था और अप्रैल 2026 में रिहा होने के बाद दोबारा इस अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह बिना नियमित पढ़ाई किए अभ्यर्थियों को कम समय में विभिन्न विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां तैयार कर ऊंची कीमत पर उपलब्ध कराता था। पुलिस का दावा है कि गिरोह अब तक देश के अलग-अलग राज्यों में हजारों फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र भेज चुका है। पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
फीलखाना थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस ने बताया कि फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पिछले चार महीनों में एसआईटी 14 आरोपियों को जेल भेज चुकी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

