यमुनानगर में पूर्व सरपंच के घर से चल रहा था नकली नोट ठगी का गिरोह
यमुनानगर, 19 जनवरी (हि.स.) यमुनानगर जिले के दौर क्षेत्र के अंतर्गत गांव भूरे का माजरा में नकली नोटों को असली बनाने का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह के पीछे पूर्व सरपंच ऋषिपाल की भूमिका लगातार स्पष्ट होती जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क गांव से नहीं, बल्कि चंडीगढ़ और मोहाली से संचालित किया जा रहा था।
पुलिस की जांच के अनुसार, पूर्व सरपंच गांव में स्थित अपनी आलीशान कोठी का उपयोग केवल ठगी की गतिविधियों के लिए करता था, जबकि स्वयं स्थायी रूप से बाहर रहकर पूरे गिरोह का संचालन करता था। खेडी लक्खा सिंह पुलिस चौकी की टीम ने इस मामले में बैंक कॉलोनी निवासी एक आरोपित को रिमांड पर लेकर पूछताछ की है, जिसके कब्जे से 20 हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए गए हैं।
इसके अलावा, पूर्व सरपंच के मकान पर की गई छापेमारी के दौरान कांच के टुकड़े, डाई से संबंधित सामग्री और रुपये के आकार के सफेद कागजों के करीब 70 पैकेट भी जब्त किए गए हैं। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह के सदस्य बाहरी लोगों को बुलाकर उन्हें नकली नोटों को बिल्कुल असली बनाने की तकनीक दिखाने का दावा करते थे। विश्वास में लेने के लिए कांच की प्लेटों के बीच कागज रखकर उन्हें गर्म पानी में डालने की प्रक्रिया बताई जाती थी, जबकि पहले से असली नोटों की गड्डियां दिखाकर लोगों को भ्रमित किया जाता था।
जैसे ही सौदे की बात पक्की होती, गिरोह का एक सदस्य अचानक पुलिस छापे का शोर मचा देता, जिससे घबराकर लोग पीछे के रास्ते से भाग जाते और उनके पैसे आरोपियों के हाथ लग जाते थे। इस पूरे नेटवर्क को पूर्व सरपंच ने योजनाबद्ध तरीके से खड़ा किया था। छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपित फरार हो गए, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
खेडी लक्खा सिंह चौकी प्रभारी जगदीप सिंह ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस ठगी नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

