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डूंगरपुर में नकली नोट गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड सहित छह गिरफ्तार

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डूंगरपुर में नकली नोट गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड सहित छह गिरफ्तार


डूंगरपुर में नकली नोट गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड सहित छह गिरफ्तार


डूंगरपुर में नकली नोट गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड सहित छह गिरफ्तार


डूंगरपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। डूंगरपुर पुलिस ने नकली भारतीय मुद्रा छापने और उसकी सप्लाई करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर मास्टरमाइंड सहित छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ऑपरेशन नोटफ्लिक्स के तहत पुलिस ने फरार चल रहे गिरोह के सरगना रवि कुमार मिश्रा को पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से पकड़ा। उसकी लगातार बदलती लोकेशन के बावजूद पुलिस टीम ने करीब 1,300 किलोमीटर तक तीन दिन पीछा कर उसे गिरफ्तार किया। मामले में डूंगरपुर से दो आरोपित पहले ही 4 लाख 95 हजार 500 रुपए के जाली नोटों के साथ पकड़े जा चुके हैं।

जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि 30 सितंबर को रामसागड़ा थाना क्षेत्र के माड़ा स्कूल ग्राउंड से भावेश खटीक और नयन जोशी को गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से 500 रुपए के 991 जाली नोट बरामद हुए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों आरोपित सोशल मीडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश निवासी रवि कुमार मिश्रा के संपर्क में थे। पुलिस कार्रवाई की भनक लगने के बाद रवि डूंगरपुर से फरार हो गया और लगातार ठिकाने बदलने लगा। इसके बाद जिला साइबर सेल और विशेष पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसकी तलाश शुरू की और आखिरकार उसे लुधियाना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया।

रवि मिश्रा से पूछताछ और साइबर सेल के तकनीकी अनुसंधान के आधार पर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में अलग-अलग राज्यों में टीमें भेजीं। कार्रवाई के दौरान हरियाणा के अंबाला से आनंद राजपूत, उत्तर प्रदेश के कानपुर से मोहम्मद आरिफ और छत्तीसगढ़ से तरुण मालेकर को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, आनंद राजपूत ने रवि को नकली नोट बनाने के लिए आवश्यक कागज जुटाने और छपाई की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी दी थी। आरिफ टेलीग्राम पर ‘अंकित पेपर सेलर’ नाम से चैनल चलाकर नकली नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाला कागज उपलब्ध कराने का दावा करता था। वहीं, तरुण मालेकर ने कथित तौर पर 500 रुपए के नोटों की पीएसडी फाइलें भेजी थीं।

पुलिस ने आरोपितों के सोशल मीडिया अकाउंट और मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण कर गिरोह के नेटवर्क का पता लगाया। जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर नकली नोट तैयार करने से जुड़ी सामग्री और डिजिटल फाइलों का आदान-प्रदान किया जाता था। पुलिस अब गिरोह के अन्य संपर्कों और नकली नोटों की सप्लाई से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है।

एसपी ने बताया कि रवि मिश्रा 13 अगस्त को डूंगरपुर आया था। यहां वसुंधरा विहार क्षेत्र में किराए का मकान लेकर उसने अन्य आरोपितों के साथ नकली नोट छापने का काम शुरू किया। इसके लिए प्रिंटर और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। करीब पांच लाख रुपए के जाली नोट तैयार कर उन्हें बाजार में खपाने की योजना थी। इसी दौरान भावेश खटीक और नयन जोशी पुलिस के हत्थे चढ़ गए और गिरोह का खुलासा हो गया।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान जाली नोटों के अलावा नोट गिनने की मशीन, प्रिंटर, लेमिनेशन मशीन, लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला कागज और छपाई के बाद बची सामग्री जब्त की है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के प्रमुख आरोपितों में शामिल आनंद राजपूत को वेब सीरीज ‘फर्जी’ देखने के बाद नकली भारतीय मुद्रा बनाने का विचार आया था। उसने यूट्यूब और फोटोशॉप की मदद से नोटों की नकल तैयार करने के प्रयास किए। शुरुआती कोशिशों में सफलता नहीं मिलने पर उसने रवि मिश्रा से संपर्क किया। जांच में यह भी सामने आया कि नकली नोट बनाने के लिए विशेष कागज जुटाने के संबंध में चीनी ऑनलाइन कंपनी अलीबाबा के माध्यम से सामग्री मंगवाने का प्रयास किया गया था।

पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में जिला साइबर सेल, रामसागड़ा थाना पुलिस और विशेष टीमों ने विभिन्न राज्यों में कार्रवाई कर गिरोह का खुलासा किया। एसपी ने बताया कि नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने, उसके परिवहन और बाजार में सप्लाई के पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष