डमी फर्मों के जरिए करोड़ों के जीएसटी-वैट फर्जीवाड़े का खुलासा, सीए समेत दो गिरफ्तार
नई दिल्ली, 16 मई (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने डमी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये के जीएसटी और वैट फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान राजीव कुमार परासर और चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन को अंजाम दिया तथा धन की लेयरिंग कर असली लाभार्थियों और वित्तीय ट्रेल को छिपाने की कोशिश की।
आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त सुबोध कुमार ने शनिवार को बताया कि ईओडब्ल्यू ने इस मामले में वर्ष 2020 में एफआईआर संख्या 85/2020 दर्ज की थी। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 468, 471 और 120-बी के तहत दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता यशश्वी शर्मा ने आरोप लगाया था कि उनकी फर्म एम/एस स्वास्तिक एंटरप्राइजेज के जीएसटी और वैट दस्तावेजों का बिना अनुमति इस्तेमाल कर करीब 28.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध कारोबारी लेनदेन किए गए। शिकायत में कहा गया था कि अज्ञात लोगों ने उनकी फर्म के दस्तावेजों और क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर फर्जी कारोबार दिखाया और कई बैंक खातों के माध्यम से भारी रकम का लेनदेन किया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि एम/एस स्वास्तिक एंटरप्राइजेज के नाम से संचालित बैंक खातों का इस्तेमाल करोड़ों रुपये की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने और उसकी लेयरिंग करने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, अलग-अलग कंपनियों और फर्मों से खातों में पैसा आने के तुरंत बाद उसे नकद निकाल लिया जाता था या फिर आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से अन्य खातों में भेज दिया जाता था। जांच एजेंसी को इन लेनदेन के पीछे किसी वास्तविक कारोबारी गतिविधि के सबूत नहीं मिले। ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डमी फर्मों और फर्जी खातों का संचालन कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, इन फर्मों को कथित तौर पर बिचौलियों और फर्जी मालिकों के नाम पर बनाया गया था। आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये को अलग-अलग खातों में घुमाकर असली लाभार्थियों तक पहुंच छिपाई जाती थी।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार जांच के दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल गुप्ता और उनकी फर्म एम/एस अशोक अतुल एंड कंपनी की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के अनुसार, संदिग्ध फर्मों के जीएसटी रिटर्न और अन्य वैधानिक अनुपालन इसी फर्म के माध्यम से दाखिल किए जा रहे थे। जांच एजेंसी को यह भी जानकारी मिली कि कुछ फर्मों के जीएसटी बकाया और जुर्माने कर्मचारियों के निजी खातों से जमा कराए गए और बाद में वह रकम उन्हें वापस कर दी गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपित लंबे समय तक जांच से बचते रहे। विशेष रूप से राजीव कुमार परासर काफी समय तक फरार रहा और लगातार ठिकाने बदलता रहा। तकनीकी निगरानी, बैंकिंग रिकॉर्ड, जीएसटी दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपितों को 12 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने रिमांड हासिल किया। अब आरोपितों से पूछताछ कर पूरे वित्तीय नेटवर्क, सह-साजिशकर्ताओं और धन के स्रोत की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार, आरोपित जीएसटी और वैट दस्तावेजों का दुरुपयोग कर डमी फर्मों के जरिए फर्जी कारोबार दिखाते थे। बैंक खातों में बड़ी रकम आने के बाद उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था, ताकि असली लेनदेन और लाभार्थियों का पता न चल सके। आरोपित राजीव कुमार परासर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ का रहने वाला है और बचपन में दिल्ली आ गया था। उसने दिल्ली से बीकॉम और मेरठ से एमकॉम की पढ़ाई की।
शुरुआती दौर में वह अकाउंटिंग फर्मों में काम करता था और बाद में शाहदरा और दिलशाद गार्डन इलाके में एम/एस एमएम इंडस्ट्रीज और एम/एस स्वास्तिक एंटरप्राइजेज के नाम से कारोबार शुरू किया। पुलिस जांच में सामने आया कि उसकी फर्म के बैंक खाते का इस्तेमाल वर्ष 2021 तक संदिग्ध कंपनियों के करोड़ों रुपये के लेनदेन के लिए किया जाता रहा। वहीं, आरोपित अतुल गुप्ता दिल्ली का रहने वाला है और वर्ष 2002 में चार्टर्ड अकाउंटेंट बना था। वह चांदनी चौक स्थित एम/एस अशोक अतुल एंड कंपनी से जुड़ा है, जिसकी स्थापना उसके पिता ने की थी। बाद में वह इसी फर्म के जरिए प्रैक्टिस करने लगा। जांच में पता चला कि उसकी फर्म और कर्मचारी संदिग्ध कंपनियों के जीएसटी रिटर्न और अन्य वैधानिक कामकाज संभालते थे।
वहीं पुलिस ने लोगों, कारोबारियों और पेशेवरों से अपील की है कि वे अपने जीएसटी, पैन, आधार, डिजिटल सिग्नेचर और कारोबारी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस और संबंधित एजेंसियों को दें।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

