एमिटी यूनिवर्सिटी के खाते से 5.20 करोड़ की ठगी मामले में फरार आरोपित गिरफ्तार
नई दिल्ली, 30 मई (हि.स.)। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एमिटी यूनिवर्सिटी के बैंक खाते से फर्जी चेकों के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी करने के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के रामनगर निवासी सुदामा नरवारे के रूप में हुई है। वह इस मामले में भगोड़ा भी था।
ईओडब्ल्यू के पुलिस उपायुक्त सुबोध कुमारने शनिवार को बताया कि जनवरी 2020 में संसद मार्ग स्थित इलाहाबाद बैंक (वर्तमान में इंडियन बैंक) के एक वरिष्ठ अधिकारी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में बताया गया था कि अगस्त 2019 में अमिटी यूनिवर्सिटी के नाम से जारी बताए गए तीन चेक बैंक में क्लियरेंस के लिए प्रस्तुत किए गए। इनमें से दो चेक क्लियर हो गए और उनके माध्यम से 5.20 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए गए, जबकि तीसरे चेक का भुगतान समय रहते रोक दिया गया।
जांच में सामने आया कि 2.50 करोड़ रुपये गुजरात के वडोदरा स्थित एनएस इंफ्रास्ट्रक्चर के खाते में भेजे गए, जबकि 2.70 करोड़ रुपये मध्य प्रदेश के बैतूल स्थित एक एनजीओ के खाते में जमा हुए। बाद में एनजीओ के खाते से 2.07 करोड़ रुपये एक अन्य खाते में ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार, ठगी की बड़ी रकम को आगे दिल्ली स्थित पांच कथित शेल कंपनियों के खातों में भेजकर लेनदेन को छिपाने का प्रयास किया गया। ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि सुदामा नरवारे बैतूल स्थित ‘मां ताप्ती मानव सेवा संस्थान’ नामक एनजीओ का सचिव और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता था। फर्जी चेक के जरिए प्राप्त 2.70 करोड़ रुपये इसी एनजीओ के खाते में जमा किए गए थे। आरोप है कि उसने इस रकम में से 2.07 करोड़ रुपये अन्य सह-आरोपितों के खातों में स्थानांतरित किए।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में अब तक तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि सुदामा नरवारे सहित कुछ अन्य आरोपित फरार थे। बैतूल के दूरदराज इलाके में रहने वाला सुदामा लगातार ठिकाने बदल रहा था और पुलिस कार्रवाई से बचता फिर रहा था। कई राज्यों में छापेमारी और लगातार निगरानी के बाद ईओडब्ल्यू की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपित 12वीं तक शिक्षित है और पूर्व में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के कार्यालय में काम कर चुका है, जिसके कारण उसे बैंकिंग प्रक्रियाओं की अच्छी जानकारी थी। मामले में अन्य फरार आरोपितों की तलाश जारी है और जांच अभी भी चल रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

