वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के साधक ने छत से कूदकर की आत्महत्या
मथुरा, 26 सितम्बर(हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिला में वृंदावन वराह घाट मार्ग स्थित गऊ कृपा कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज के एक साधक (परिकर) दीपक कुमार उर्फ रसिक दुलारीशरण की संदिग्ध परिस्थितियों में चौथी मंजिल से गिरकर मौत हो गई। घटना के बाद घायल अवस्था में उन्हें तुरंत सर्वाेदय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही वृंदावन कोतवाली पुलिस मौके पर पहुँची और मृतक की जाँच के दौरान उनका प्राइवेट पार्ट कटा हुआ मिला, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।
मृतक साधक की पहचान जबलपुर (मध्य प्रदेश) निवासी 25 वर्षीय दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारीशरण के रूप में हुई है। दीपक वर्ष 2025 में संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेकर वृंदावन आए और आश्रम में रहकर बिजली व्यवस्था संभालने के साथ राधा रानी की उपासना कर रहे थे। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने आश्रम में छानबीन की तो साधक के कमरे से कटा हुआ प्राइवेट पार्ट और एक ग्राइंडर बरामद हुआ। ग्राइंडर पर खून के धब्बे और फिंगरप्रिंट मिले हैं। इसके अलावा आश्रम की सीढ़ियों पर भी खून के निशान पाए गए हैं। पुलिस को आशंका है कि छत से छलांग लगाने से पहले साधक ने ग्राइंडर से अपना अंग काटा होगा।
घटना की सूचना मिलते ही एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह और सीओ वृंदावन संदीप सिंह पुलिसबल के साथ मौके पर पहुँचे। एसपी सिटी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
पुलिस फिलहाल आश्रम और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके साथ ही मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल निकालकर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उनकी आखिरी बार किससे बात हुई थी। पुलिस ने परिजनों को सूचित कर दिया है और आश्रम के अन्य साधकों से भी पूछताछ की जा रही है।
बेटे की मौत की खबर सुनते ही जबलपुर से वृंदावन पहुँची मां लोंग बाई पटेल, भाई मनीष और बड़ी बहन का रो-रोकर हाल बेहाल है। मां लोंग बाई ने अश्रुपूरित आंखों से बताया कि उन्हें दोपहर में फोन पर दीपक की तबीयत खराब होने की सूचना मिली थी, लेकिन यहां पहुंचने पर सब कुछ खत्म हो चुका था।
छोटे भाई मनीष पटेल ने बताया कि लगभग दो साल पहले वृंदावन जाने के बाद दीपक कभी घर वापस नहीं लौटा। धीरे-धीरे परिजनों से उसकी बातचीत भी कम होती चली गई थी। जब भी परिवार उससे मिलने वृंदावन आता तो उन्हें अलग जगह ठहरना पड़ता था और केवल कुछ समय के लिए ही मुलाकात हो पाती थी। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार

