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डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग दंपती से 2 करोड़ की ठगी करने वाला गिरफ्तार

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डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग दंपती से 2 करोड़ की ठगी करने वाला गिरफ्तार


जयपुर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। पुलिस,एटीएस,एनआईए और आरबीआई का अधिकारी बनकर बुजुर्ग दंपती को डिजिटल अरेस्ट करने और उनसे दो करोड़ रुपए से अधिक की ठगी करने के मामले में जयपुर की सेन्ट्रल साइबर पुलिस ने बाड़मेर निवासी एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी तगाराम ने ठगी की रकम अपने बैंक खातों में मंगवाने और निकालने में मदद की थी। इस मामले में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

उप महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह के अनुसार जयपुर निवासी परिवादिया ने 11 सितंबर 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवादिया ने बताया कि 17 अगस्त को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर खुद को पुलिस निरीक्षक बताया और उसके खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही। इसके बाद आरोपियों ने एटीएस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया। उन्होंने बुजुर्ग दंपती को डराया कि उनका नाम आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने वालों की सूची में है और उनके बैंक खातों का इस्तेमाल संदिग्ध लेन-देन में हो रहा है।

आरोपियों ने पुलिस, एटीएस, एनआईए, आरबीआई, भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम व पहचान का दुरुपयोग किया। व्हाट्सएप के जरिए फर्जी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट और कथित सरकारी व बैंकिंग प्रमाण-पत्र भेजकर दंपती को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर अलग-अलग बैंक खातों में दो करोड़ रुपए से अधिक की राशि हस्तांतरित करवा ली।

जांच के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट, बैंक खातों के विवरण और केवाईसी दस्तावेजों सहित तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि ठगी की राशि बाड़मेर निवासी तगाराम पुत्र मेहाराम के बैंक खाते में भी आई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने परिचित के कहने पर भारतीय स्टेट बैंक की सिणधरी शाखा स्थित खाते का विवरण उपलब्ध कराया था। 20 अगस्त 2026 को इस खाते में दो लाख रुपए आए। इसके बाद तगाराम ने चेक के जरिए एक लाख 90 हजार रुपए और एटीएम से 10 हजार रुपए निकाले और रकम दूसरे आरोपी को सौंप दी। इसके बदले उसे 10 हजार रुपए कमीशन मिला। आरोपी ने बैंक ऑफ इंडिया के अपने खाते का विवरण भी उपलब्ध कराया था।

स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा ने बताया कि पुलिस अब व्हाट्सएप और टेलीग्राम रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईपीडीआर) तथा बैंक लेन-देन की कड़ियों का विश्लेषण कर रही है। ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश