डीआईजी संजीव गांधी पर एक और एफआईआर, पुलिस जवानों की मरम्मत के पैसे सरकारी आवास पर खर्च का आरोप
शिमला, 23 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल पुलिस के डीआईजी और शिमला के पूर्व पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी के खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में एक और एफआईआर दर्ज की गई है। इस बार पुलिस जवानों के सरकारी आवासों और पुलिस भवनों की मरम्मत के लिए आवंटित धनराशि के इस्तेमाल में अनियमितताओं के आरोप हैं। पुलिस मुख्यालय की ओर से गठित ऑडिट समिति की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस थाना शिमला में एफआईआर दर्ज की गई। भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत दर्ज मामले में आरोप है कि मरम्मत के लिए आवंटित धनराशि में से 14,07,392 रुपये संजीव गांधी के शिमला स्थित सरकारी आवास 'साउथवुड' पर खर्च किए जाने दर्शाए गए, जबकि इसके लिए अलग बजट की स्वीकृति के दस्तावेज नहीं मिले। शिमला पुलिस के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।
प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि ऑडिट में रामपुर के एसडीपीओ आवास और शोघी पुलिस बैरियर की मरम्मत के लिए निर्धारित धनराशि भी संजीव गांधी के सरकारी आवास पर खर्च दर्शाने की बात सामने आई है। इससे पहले एक कांस्टेबल की शिकायत पर स्वीकृत बिलों का भुगतान नहीं मिलने और पुलिस फंड से कथित अवैध निकासी के मामले में भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
रामपुर और शोघी की मरम्मत के लिए निर्धारित धन पर सवाल
ऑडिट समिति ने वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान पुलिस भवनों और जवानों के सरकारी आवासों की मरम्मत तथा रखरखाव के लिए आवंटित करीब 1.28 करोड़ रुपये के खर्च की जांच की। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में तत्कालीन एसपी के तौर पर संजीव गांधी के सरकारी आवास 'साउथवुड' पर 14,07,392 रुपये खर्च किए जाने का रिकॉर्ड मिला। ऑडिट समिति को इन कार्यों के लिए सरकार या पुलिस मुख्यालय से अलग बजट स्वीकृत होने के दस्तावेज नहीं मिले। संबंधित कार्य मूल प्रस्तावों में भी शामिल नहीं थे और सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं पाए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक रामपुर के एसडीपीओ आवास की मरम्मत के लिए स्वीकृत 2.80 लाख रुपये की राशि संबंधित आवास पर खर्च करने के बजाय संजीव गांधी के शिमला स्थित सरकारी आवास पर खर्च दर्शाई गई। इसी तरह शोघी पुलिस बैरियर की गुमटी की मरम्मत के लिए निर्धारित 2.50 लाख रुपये की राशि भी उनके आवास पर खर्च दर्शाने का आरोप है। ऑडिट में कहा गया है कि फरवरी 2023 में शोघी में मरम्मत कार्य पूरा होने का हवाला देकर राशि वापस प्राप्त की गई थी, लेकिन वहां काम पूरा होने के प्रमाण समिति को नहीं मिले।
दो वित्तीय वर्षों के खर्च के दस्तावेज भी नहीं मिले
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में संजीव गांधी के सरकारी आवास पर 1.62 लाख रुपये और वर्ष 2024-25 में 7.22 लाख रुपये खर्च किए जाने दर्शाए गए। इन कार्यों के लिए आवश्यक पूर्व स्वीकृति और जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए। समिति ने खर्च की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज की है। जांच में यह पता लगाया जाना है कि संबंधित धनराशि वास्तव में किन कार्यों पर खर्च हुई और उसके इस्तेमाल में निर्धारित वित्तीय नियमों का पालन किया गया या नहीं।
रिपोर्ट में वर्ष 2025-26 के बजट का भी उल्लेख है। इस वर्ष 28.67 लाख रुपये के बजट के तहत 50 कार्य प्रस्तावित थे। इनमें से 22 कार्य किए जाने का रिकॉर्ड मिला, जिनमें 13 कार्य मूल स्वीकृत प्रस्ताव से बाहर के थे। ऑडिट समिति ने स्वीकृत प्रस्तावों से अलग कार्यों पर धन खर्च करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
शिमला पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार मामले की जांच जारी है। संबंधित खर्चों के अभिलेखों और स्वीकृतियों की पड़ताल की जा रही है। प्रवक्ता द्वारा शोघी पुलिस पोस्ट की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वहां पुलिस पोस्ट आज भी एक कंटेनर में संचालित हो रही है और कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करनी पड़ रही है।
बता दें कि संजीव गांधी के खिलाफ इससे पहले पुलिस लाइन कैथू में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत पर पुलिस थाना सदर शिमला में एफआईआर दर्ज की गई थी। कांस्टेबल ने आरोप लगाया था कि उसने वर्ष 2024 और 2025 के दौरान सरकारी कामकाज और जरूरी व्यवस्थाओं पर अपनी जेब से 1,87,890 रुपये खर्च किए थे। उसने संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए थे और भुगतान को स्वीकृति भी मिल गई थी, लेकिन उसे राशि नहीं मिली।
संजीव कुमार गांधी 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह जनवरी 2023 से फरवरी 2026 तक शिमला के पुलिस अधीक्षक रहे। जनवरी 2026 में डीआईजी पद पर पदोन्नति के बाद उन्हें 9 फरवरी को हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक का कार्यभार सौंपा गया था। 24 फरवरी को उन्हें कार्मिक विभाग में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद उन्हें डीआईजी ट्रैफिक, टूरिज्म एंड रेलवे (टीटीआर) के पद पर तैनात किया गया और वह 24 मार्च से इस पद पर कार्यरत थे। अगस्त 2026 में सरकार ने उनकी सेवाएं फिर कार्मिक विभाग को सौंप दीं। बाद में उन्हें हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, कांगड़ा के प्रबंध निदेशक पद पर नियुक्त किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

