दमोह: रिश्वत लेने वाले राजस्व निरीक्षक को 4 वर्ष का सश्रम कारावास
दमोह, 31 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में तत्कालीन राजस्व निरीक्षक मनीराम गौंड को रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार देते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास तथा दो हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-7 के तहत दोषसिद्ध माना।
अभियोजन के अनुसार, घटना के समय आरोपी मनीराम गौंड राजस्व निरीक्षक के पद पर पदस्थ था। फरियादी पंकज कुमार जैन का राजस्व विभाग से संबंधित सीमांकन का कार्य लंबित था। आरोप है कि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने के एवज में आरोपी ने फरियादी से पांच हजार रुपये की अवैध रिश्वत की मांग की।
फरियादी ने रिश्वत देकर अपना कार्य कराने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना। उसने 15 मार्च 2022 को लोकायुक्त संगठन, सागर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि संबंधित राजस्व निरीक्षक बिना रिश्वत लिए सीमांकन का कार्य करने को तैयार नहीं है।
शिकायत प्राप्त होने के बाद लोकायुक्त संगठन ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सबसे पहले शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि होने पर लोकायुक्त की टीम ने विधिवत ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।
योजना के अनुसार 21 मार्च 2022 को लोकायुक्त संगठन, सागर की टीम ने स्वतंत्र पंच साक्षियों की मौजूदगी में ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी के निर्देशानुसार रखी गई रिश्वत की राशि बरामद की गई। पूरी कार्रवाई का पंचनामा तैयार किया गया तथा वैज्ञानिक परीक्षण भी कराया गया। जांच के दौरान मौखिक, दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए गए, जिन्होंने अभियोजन के मामले को मजबूत आधार प्रदान किया।
विवेचना पूरी होने के बाद आरोपी के विरुद्ध विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष स्वतंत्र पंच साक्षियों के बयान, दस्तावेजी प्रमाण, वैज्ञानिक परीक्षण की रिपोर्ट तथा अन्य आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष के तर्कों पर भी न्यायालय ने विचार किया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध पाया गया।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों के परीक्षण के उपरांत विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), दमोह ने शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी मनीराम गौंड को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-7 के अंतर्गत दोषी ठहराया और चार वर्ष के सश्रम कारावास के साथ दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
प्रकरण में शासन की ओर से प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन धर्मेन्द्र सिंह तारन के निर्देशन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी संजय कुमार रावत ने प्रभावी पैरवी की। वहीं सहायक ग्रेड-3 विनय नामदेव ने अभियोजन कार्य में आवश्यक सहयोग प्रदान किया।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

