दमोह: रिश्वत लेने वाली महिला बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी को 4 वर्ष का सश्रम कारावास
दमोह, 29 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में बुधवार को न्यायालय ने रिश्वतखोरी के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में महिला एवं बाल विकास विभाग की तत्कालीन प्रभारी परियोजना अधिकारी श्वेता सिंह ठाकुर को दोषी करार देते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹2000 के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं प्रकरण में सहआरोपी बनाए गए उनके पति अनूप जैन को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
यह फैसला विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) संतोष कुमार गुप्ता की अदालत द्वारा सुनाया गया।
अभियोजन के अनुसार ग्राम घुटरिया, तहसील तेंदूखेड़ा निवासी फरियादिया श्रीमती भानुकुमारी ने 22 दिसंबर 2019 को लोकायुक्त कार्यालय सागर में शिकायत दर्ज कराई थी कि महिला एवं बाल विकास विभाग में उनके विरुद्ध जारी नोटिस पर कार्रवाई न करने के एवज में तत्कालीन प्रभारी परियोजना अधिकारी श्वेता सिंह ठाकुर द्वारा ₹6000 की रिश्वत मांगी जा रही है।
शिकायत की पुष्टि के लिए लोकायुक्त टीम ने फरियादिया को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया। 23 दिसंबर 2019 को आरोपी से हुई बातचीत रिकॉर्ड की गई, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने 26 दिसंबर 2019 को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।
निर्धारित कार्रवाई के तहत फरियादिया द्वारा ₹4000 की रिश्वत राशि आरोपी अधिकारी को दी गई। राशि स्वीकार करते ही लोकायुक्त टीम ने श्वेता सिंह ठाकुर को रंगे हाथ पकड़ लिया। मौके पर कराए गए सोडियम कार्बोनेट परीक्षण में आरोपी के हाथ एवं वस्त्र गुलाबी पाए गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।
विवेचना उपरांत प्रकरण विशेष न्यायालय दमोह में प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन द्वारा दस्तावेजी साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्डिंग, ट्रैप पंचनामा, रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट तथा गवाहों के बयान प्रस्तुत किए गए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी श्वेता सिंह ठाकुर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹2000 अर्थदंड से दंडित किया।
वहीं प्रकरण में आरोपी के पति अनूप जैन के विरुद्ध पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य सिद्ध न होने पर न्यायालय ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
प्रकरण में अभियोजन की ओर से प्रभारी उपसंचालक अभियोजन धर्मेंद्र सिंह तारन के निर्देशन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी संजय कुमार रावत ने पैरवी की। सहायक ग्रेड-3 विनय नामदेव का सहयोग रहा।
दमोह न्यायालय के इस निर्णय को भ्रष्टाचार के विरुद्ध महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई माना जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

