दमोहःरिश्वत लेने के मामले में तत्कालीन प्रभारी सहायक यंत्री को चार वर्ष का कारावास
दमोह, 30 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह न्यायालय में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामले में बुधवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संतोष कुमार गुप्ता ने तत्कालीन प्रभारी सहायक यंत्री जनपद पंचायत दमोह गोविंद दास अहिरवार को दोषसिद्ध पाते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास एवं पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 एवं धारा 13(1)(b) सहपठित धारा 13(2) के तहत दोषसिद्ध किया।
अभियोजन के अनुसार फरियादी लीलेन्द्र सिंह लोधी ने 13 अक्टूबर 2021 को लोकायुक्त पुलिस सागर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी माता मूंगाबाई तत्कालीन सरपंच ग्राम पंचायत बालाकोट के कार्यकाल में मनरेगा योजना के अंतर्गत कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों के देयकों एवं बिलों के भुगतान की अनुशंसा के एवज में तत्कालीन प्रभारी सहायक यंत्री गोविंद दास अहिरवार द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है।
शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत बालाकोट में मनरेगा योजना के तहत नवीन तालाब, खकरी निर्माण, वृक्षारोपण सहित अन्य कार्य कराए गए थे। इन कार्यों से संबंधित लगभग 70 से 80 लाख रुपये के देयकों एवं बिलों के भुगतान की अनुशंसा के लिए आरोपी द्वारा पांच प्रतिशत के हिसाब से 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग किए जाने की शिकायत की गई थी।
लोकायुक्त पुलिस द्वारा शिकायत का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के बाद एक नवंबर 2021 को ट्रैप कार्रवाई की गई। अभियोजन के अनुसार जनपद पंचायत कार्यालय दमोह परिसर में आरोपी गोविंद दास अहिरवार को 50 हजार रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान आरोपी की पेंट की दाहिनी जेब से रिश्वत की राशि बरामद किए जाने की बात अभियोजन साक्ष्य में सामने आई।
ट्रैप कार्रवाई के दौरान आरोपी के हाथ एवं कपड़ों की रासायनिक जांच भी की गई। अभियोजन के अनुसार रासायनिक परीक्षण के दौरान तैयार घोल का रंग गुलाबी पाया गया। इसके बाद मामले की विवेचना में भौतिक, मौखिक एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य संकलित किए गए। एफएसएल से प्राप्त रासायनिक एवं ध्वनि परीक्षण संबंधी रिपोर्ट को भी विवेचना में शामिल किया गया।
विवेचना पूर्ण होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं होने संबंधी बचाव भी प्रस्तुत किया गया। अभियोजन के अनुसार इसे अन्यत्र उपस्थिति यानी 'Plea of Alibi' के रूप में प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय के समक्ष पंचसाक्षियों की गवाही, नक्शा-मौका, रिश्वत राशि की जब्ती, रासायनिक परीक्षण से संबंधित साक्ष्य तथा विवेचना में संकलित अन्य सामग्री प्रस्तुत की गई।
न्यायालय ने प्रकरण में उपलब्ध दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्यों तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्कों पर विचार करने के बाद आरोपी गोविंद दास अहिरवार को संबंधित धाराओं में दोषसिद्ध माना। इसके बाद न्यायालय ने 30 सितंबर 2026 को आरोपी को चार वर्ष के सश्रम कारावास एवं पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित करने का आदेश पारित किया।
मामले में अभियोजन की ओर से प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन धर्मेन्द्र सिंह तारन के निर्देशन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी संजय कुमार रावत ने पैरवी की। अभियोजन कार्य में विनय नामदेव द्वारा आवश्यक सहयोग किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

