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बांदा में सरकारी खाते से 1.68 करोड़ निकालने की साजिश नाकाम, केस दर्ज

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बांदा में सरकारी खाते से 1.68 करोड़ निकालने की साजिश नाकाम, केस दर्ज


बांदा, 02 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में साइबर ठगों ने सरकारी विभाग के खाते में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये निकालने का प्रयास, अधिकारियों की सतर्कता और पुलिस की तत्परता से विफल कर दिया गया। इस मामले में करीब 1 करोड़ 68 लाख रुपये की धनराशि सुरक्षित बचा ली गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) बांदा के एक खाते से अवैध तरीके से धन निकालने की साजिश रची। ठगों ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, कूटरचित दस्तावेज और नकली हस्ताक्षरों का सहारा लेते हुए इंटरनेट बैंकिंग सुविधा शुरू कराने का प्रयास किया।

बताया गया कि एक व्यक्ति संजय कुमार बनकर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, शाखा बड़ोखरखुर्द पहुंचा और खुद को डीआरडीए का कर्मचारी बताते हुए खाते में नेट बैंकिंग सुविधा सक्रिय कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। इसके साथ ही प्रवीण आनन्द नामक व्यक्ति ने स्वयं को परियोजना निदेशक बताकर बैंक प्रबंधक से फोन पर बातचीत भी की।

हालांकि, बैंक अधिकारियों को संदेह होने पर मामले की जांच की गई, जिसमें प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि संबंधित नाम का कोई कर्मचारी डीआरडीए में कार्यरत नहीं है और प्रस्तुत पत्रों पर किए गए हस्ताक्षर, मोहर एवं ई-मेल आईडी सभी नकली हैं।

ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों की जागरूकता, बैंक प्रबंधन की सतर्कता और साइबर थाना बांदा की सक्रियता के चलते बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी होने से बच गई। बैंक खाते में मौजूद लगभग 1.68 करोड़ रुपये सुरक्षित हैं।

इस संबंध में परियोजना निदेशक, डीआरडीए बांदा की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर साइबर क्राइम थाना बांदा में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने इस संगठित साइबर गिरोह के सदस्यों की पहचान कर ली है और जल्द गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज कर दी है।

अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने शनिवार को बताया कि जनपद बांदा में पीडी डीआरडीए से प्राप्त तहरीर के आधार पर साइबर क्राइम थाना बांदा में एक अभियोग पंजीकृत किया गया है। इसमें साइबर अपराधियों के द्वारा पीडी डीआरडीए के माध्यम से संचालित एक खाते में फर्जी एवं कूटरचित आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य अभिलेखों तथा फर्जी हस्ताक्षर बनाकर इंटरनेट बैंकिंग से खाते का पैसा निकालने का दुष्प्रयास किया गया है। ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों की जागरूकता, बैंक अधिकारियों की सतर्कता और साइबर पुलिस बांदा के सहयोग से खाते में लगभग 1 करोड़ 68 लाख रुपये को बचा लिया गया है। इस अपराध में शामिल साइबर फ्राॅडस्टर्स का पता लगाया गया है। विवेचना की जा रही है। साक्ष्य संकलन कर शीघ्र ही गिरफ्तारी कर विवेचना का निस्तारण किया जाएगा।

प्रशासन ने सभी विभागों और बैंक अधिकारियों को सतर्क रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह