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एक दिन में 236 नशा तस्करों के ठिकानों पर पुलिस की दबिश, ड्रग्स और लाखों की नकदी बरामद

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एक दिन में 236 नशा तस्करों के ठिकानों पर पुलिस की दबिश, ड्रग्स और लाखों की नकदी बरामद


शिमला, 10 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बुधवार को पुलिस ने एक ही दिन में बड़ा राज्यव्यापी ऑपरेशन चलाया। चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान के दूसरे चरण के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सक्रिय मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ एक साथ छापेमारी की गई।

इस दौरान पुलिस और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की संयुक्त टीमों ने 236 संदिग्ध नशा तस्करों के घरों, ठिकानों और अन्य परिसरों की तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान चिट्टा, अफीम, चूरा-पोस्त, अवैध शराब और नकदी बरामद की गई, जबकि सात नए मामले भी दर्ज किए गए हैं।

प्रदेश पुलिस के अनुसार यह अभियान खुफिया सूचनाओं, तकनीकी विश्लेषण और विभिन्न जिलों के बीच समन्वय के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से चलाया गया। अभियान का मकसद नशे के कारोबार से जुड़े सक्रिय नेटवर्क की पहचान कर उन्हें तोड़ना, मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना और इस अवैध धंधे में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना था।

पुलिस के मुताबिक छापेमारी के दौरान पुलिस ने 12.59 ग्राम चिट्टा (हेरोइन), 13.8 किलोग्राम चूरा-पोस्त, 70 ग्राम अफीम और 14,250 मिलीलीटर अवैध शराब बरामद की। इसके अलावा 2 लाख 31 हजार 690 रुपये की नकदी भी जब्त की गई। बरामदगी के आधार पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत पांच नए मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत दो अन्य मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद सामग्री और वित्तीय लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है ताकि नशे के कारोबार की पूरी श्रृंखला तक पहुंचा जा सके।

पुलिस के अनुसार यह अभियान केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, इसका उद्देश्य समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना भी है।

राज्य सरकार और पुलिस विभाग ने साफ किया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और भविष्य में भी ऐसे अभियान और अधिक व्यापक तथा आक्रामक तरीके से जारी रहेंगे।

पुलिस ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि यदि उन्हें नशे की तस्करी, बिक्री, भंडारण या सेवन से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी मिले तो वे तुरंत डायल-112, नजदीकी पुलिस थाने या अन्य उपलब्ध माध्यमों से सूचना दें। पुलिस ने यह भी भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

डीजीपी अशोक तिवारी का कहना है कि जनसहयोग और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही हिमाचल को चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों के अभिशाप से मुक्त बनाया जा सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा