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शिमला में अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क का खुलासा, तीन सप्लायर गिरफ्तार

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शिमला में अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क का खुलासा, तीन सप्लायर गिरफ्तार


शिमला, 01 अगस्त (हि.स.)। शिमला पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए दो अलग-अलग एनडीपीएस मामलों में अंतरराज्यीय सप्लाई नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने वैज्ञानिक, तकनीकी और वित्तीय जांच के आधार पर पंजाब और हरियाणा से तीन मुख्य सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि अब कार्रवाई केवल नशा बरामद करने या उसे ले जाने वाले लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। हर मामले में पूरे सप्लाई नेटवर्क और उसके मुख्य संचालकों तक पहुंचकर कार्रवाई की जा रही है।

पहला मामला पश्चिमी शिमला थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार 8 जुलाई को शोघी बैरियर पर स्पेशल सेल ने एक एचआरटीसी बस की जांच के दौरान कुमारसैन निवासी 19 वर्षीय अनुज राजटा के कब्जे से छह ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद किया था। इस संबंध में थाना पश्चिमी शिमला में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 के तहत मामला दर्ज कर उसे मौके पर गिरफ्तार किया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों, गूगल पे लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की। इस जांच में पंजाब तक फैले नशा तस्करी के नेटवर्क का पता चला। इसके बाद विशेष पुलिस टीम पंजाब भेजी गई। टीम ने कपूरथला से साजन सिंह और जालंधर से जतिन कुमार को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार जांच में सामने आया कि साजन सिंह इस अंतरराज्यीय चिट्टा तस्करी नेटवर्क का मुख्य संचालक था, जबकि जतिन कुमार चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में उसके लिए चिट्टे की सप्लाई करता था। जांच में यह भी पता चला कि अनुज राजटा ने चंडीगढ़ में जतिन कुमार से चिट्टा खरीदा था और उसके बदले 10,500 रुपये गूगल पे के माध्यम से साजन सिंह को भेजे थे। तकनीकी और वित्तीय जांच में आरोपियों के बीच लंबे समय से संपर्क और लेन-देन की पुष्टि हुई।

दूसरा मामला रामपुर थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने 17 जुलाई को रोपड़ू नाला क्षेत्र में एक कार की तलाशी के दौरान किन्नौर निवासी अजेन्द्र कुमार, कुल्लू निवासी मोनिका और शिमला निवासी निखिल के कब्जे से नौ ग्राम चिट्टा, एक डिजिटल वजन मशीन और 26 हजार रुपये नकद बरामद किए थे। इस मामले में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 और 29 के तहत मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

इस मामले की जांच में भी पुलिस ने मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों, गूगल पे लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। पूछताछ और तकनीकी जांच में पता चला कि मोनिका और निखिल ने यह चिट्टा चंडीगढ़ के मनीमाजरा क्षेत्र में सक्रिय रवि उर्फ रवि गिल से लिया था।

पुलिस के अनुसार रवि गिल ऑटो चालक के रूप में काम करने की आड़ में नशा तस्करी का अवैध कारोबार चला रहा था।

जांच में सामने आया कि 16 जुलाई को रवि गिल ने दोनों आरोपियों को करीब 20 ग्राम चिट्टा दिया था। इसमें से लगभग 10 ग्राम बेचा जा चुका था, जबकि बाकी मात्रा आगे बेचने के लिए उनके पास थी।

पुलिस ने बताया कि चिट्टा खरीदने की रकम गूगल पे के माध्यम से रवि गिल की पत्नी के बैंक खाते में भेजी गई थी। वित्तीय जांच में इसकी पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस टीम ने हरियाणा के पिंजौर में दबिश देकर रवि उर्फ रवि गिल को गिरफ्तार कर लिया।

एसएसपी शिमला गौरव सिंह का कहना है कि वर्ष 2026 में अब तक 63 मुख्य सप्लायरों को गिरफ्तार किया गया है और 48 बड़े अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क ध्वस्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार वर्ष 2025 में सात मुख्य सप्लायर गिरफ्तार हुए थे और चार नेटवर्क तोड़े गए थे, जबकि वर्ष 2024 में सात मुख्य सप्लायरों की गिरफ्तारी हुई थी और दो नेटवर्क ध्वस्त किए गए थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा