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शिमला पुलिस ने जब्त की चिट्टा तस्करों की 4.13 करोड़ की संपत्ति

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शिमला पुलिस ने जब्त की चिट्टा तस्करों की 4.13 करोड़ की संपत्ति


शिमला, 21 सितंबर (हि.स.)। नशे के कारोबार पर शिकंजा कसते हुए शिमला पुलिस ने अब तस्करों की संपत्ति के आर्थिक स्रोत तक पहुंचना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पुलिस ने एक चिट्टा तस्करी मामले की वित्तीय जांच के बाद आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों की करीब 4.13 करोड़ रुपये की 20 चल-अचल संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की है। पुलिस जांच में इन संपत्तियों के लिए कोई पर्याप्त ज्ञात और वैध आय का स्रोत सामने नहीं आया।

पुलिस के अनुसार जांच में इन संपत्तियों को नशे के अवैध कारोबार से अर्जित धन से जुड़ा पाया गया है।

मामला सदर थाना शिमला में दर्ज एनडीपीएस अधिनियम के तहत एक मामले से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार 13 अगस्त 2024 को पुराने बस स्टैंड शिमला स्थित एक होटल से सूरज और रोहित निवासी बिहार के कब्जे से करीब 6.5 ग्राम हेरोइन यानी चिट्टा बरामद किया गया था। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई और नशे की आपूर्ति से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच की गई। इस दौरान मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारियां भी हुईं।

पुलिस ने वर्ष 2026 में इस मामले में वित्तीय जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपियों के साथ उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की पड़ताल की गई। इस प्रक्रिया में नौ आरोपी और 10 एसोसिएट्स यानी सहयोगियों समेत कुल 19 लोगों के नाम पर 20 चल और अचल संपत्तियां चिन्हित की गईं। इनमें दो आवासीय भूखंड, दो आवासीय भवन, एक अपार्टमेंट और एक होम-स्टे शामिल हैं। इसके अलावा महिंद्रा थार, हुंडई क्रेटा, मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा और टाटा नेक्सन सहित कई वाहन भी जांच के दायरे में आए हैं।

वित्तीय जांच में इन संपत्तियों की खरीद और स्वामित्व से जुड़े स्रोतों की पड़ताल की गई।

पुलिस के मुताबिक संबंधित आरोपियों और उनके सहयोगियों की कोई ऐसी ज्ञात और वैध आय सामने नहीं आई, जिससे इन संपत्तियों को अर्जित करना पर्याप्त रूप से स्पष्ट हो सके। उपलब्ध वित्तीय और संपत्ति संबंधी तथ्यों के परीक्षण के बाद पुलिस ने इन्हें नशे के अवैध कारोबार से अर्जित धन से जुड़ी संपत्तियां माना और एनडीपीएस अधिनियम के तहत इन्हें जब्त करने की कार्रवाई की। एनडीपीएस अधिनियम में अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति की पहचान, उसे जब्त या फ्रीज करने और आगे जब्ती की प्रक्रिया का प्रावधान है।

शिमला पुलिस की इस कार्रवाई का दायरा केवल नशे की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। पुलिस अब नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क की भी जांच कर रही है। नशे से कमाए गए पैसे से बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार से जुड़े आर्थिक आधार को कमजोर करना है।

एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया की वर्ष 2026 में अब तक 15 एनडीपीएस मामलों में 68 आरोपियों और उनके एसोसिएट्स की 12.52 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। इनमें आवासीय और व्यावसायिक भूखंड, आवासीय अपार्टमेंट, व्यावसायिक दुकानें, महंगी और व्यावसायिक गाड़ियां, बैंक में जमा रकम, नकदी और सोने के आभूषण जैसी संपत्तियां शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक वर्ष 2024 और 2025 में इस तरह की कार्रवाई नहीं की गई थी। वर्ष 2026 में वित्तीय जांच को नशा विरोधी कार्रवाई का हिस्सा बनाकर पुलिस ने संपत्ति और धन के स्रोत की पड़ताल पर जोर दिया है। इससे नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का दायरा नशे की बरामदगी से आगे बढ़कर उससे अर्जित संपत्ति तक पहुंचा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा