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एलएसडी ड्रग तस्करी में संलिप्त चार पुलिसकर्मी रिमांड पर

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एलएसडी ड्रग तस्करी में संलिप्त चार पुलिसकर्मी रिमांड पर


शिमला, 20 मार्च (हि.स.)। शिमला में सामने आए एलएसडी ड्रग तस्करी मामले ने पुलिस विभाग के भीतर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब एक करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत वाली एलएसडी की खेप से जुड़े इस मामले में गिरफ्तार किए गए चार पुलिसकर्मियों को अदालत ने चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसियां अब इनसे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश कर रही हैं।

शिमला पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी पुलिसकर्मी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) में तैनात थे। इनमें राजेश कुमार (40 वर्ष), निवासी गांव 14 मील, डाकघर बडाग्राम, तहसील मनाली, जिला कुल्लू, समीर (40 वर्ष), निवासी वार्ड नंबर 7, पारला भुंतर, तहसील भुंतर, जिला कुल्लू, नितेश (46 वर्ष), निवासी गांव बजौरा, डाकघर व तहसील भुंतर, जिला कुल्लू और अशोक कुमार (42 वर्ष), निवासी गांव वाशिंग, जिला कुल्लू शामिल हैं। इन सभी को 19 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और आज अदालत ने इन्हें चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है।

इस पूरे मामले की शुरुआत 10 मार्च 2026 को हुई, जब पुलिस थाना न्यू शिमला की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए संदीप शर्मा (जिला मोगा, पंजाब) और प्रिया शर्मा (जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 562 स्ट्रिप्स (स्टैम्प साइज) एलएसडी, जिसका कुल वजन 11.570 ग्राम है, बरामद किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है।

प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने इस मामले की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, जिसमें एलएसडी सप्लाई चेन का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि इस खेप का मुख्य सप्लायर नेविल हैरिसन है, जो केरल के कालीकट का रहने वाला है। पुलिस ने उसे 13 मार्च को गुरुग्राम, हरियाणा से गिरफ्तार किया।

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस मामले ने और गंभीर रूप ले लिया। पुलिस के अनुसार संदीप शर्मा और नेविल हैरिसन द्वारा कुल्लू जिले में इस एलएसडी खेप की तस्करी की गई थी। इसी दौरान एसटीएफ के इन चार पुलिसकर्मियों ने इस ट्रैफिकिंग को इंटरसेप्ट किया था। लेकिन आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय ये खुद तस्करों के साथ मिल गए और नशे की इस खेप को आगे बढ़ाने में मदद की।

पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, आपराधिक साजिश, घोर अनुशासनहीनता और नैतिक कदाचार का है। डिजिटल, भौतिक और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद इन पुलिसकर्मियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई। इसके बाद शिमला पुलिस की सिफारिश पर विस्तृत जांच कर 16 मार्च को एडीजी सीआईडी ने इन चारों को निलंबित कर दिया।

अब पुलिस रिमांड के दौरान जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, क्या यह कोई बड़ा अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोह है और पुलिसकर्मियों की इसमें क्या-क्या भूमिका रही।

एसएसपी शिमला गौरव सिंह का कहना है कि प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत यह कार्रवाई की जा रही है और आगे भी ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा