शिमला के पूर्व एसपी संजीव गांधी पर एफआईआर, कांस्टेबल के 1.87 लाख रुपये के भुगतान में धोखाधड़ी का आरोप
शिमला, 22 अक्टूबर (हि.स.)। सरकारी काम के लिए अपनी जेब से 1.87 लाख रुपये खर्च करने वाले एक पुलिस कांस्टेबल को स्वीकृत बिलों का भुगतान नहीं मिलने के मामले में शिमला के पूर्व पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कांस्टेबल ने आरोप लगाया है कि उससे भुगतान संबंधी वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए गए, लेकिन रकम उसके खाते में नहीं पहुंची। शिकायत के बाद हुई जांच में जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो वर्षों के दौरान 2.35 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला भी सामने आया है।
पुलिस थाना सदर शिमला में दर्ज एफआईआर में संजीव कुमार गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 लगाई गई हैं।
शिमला पुलिस की तरफ से वीरवार को ये जानकारी दी गई।
बिल स्वीकृत हुए, फिर भी नहीं मिला भुगतान
पुलिस लाइन कैथू में तैनात कांस्टेबल की शिकायत के अनुसार वर्ष 2024 और 2025 के दौरान उसे सरकारी कामकाज और जरूरी व्यवस्थाएं पूरी करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके लिए उसे पहले अपनी जेब से खर्च करने और बाद में भुगतान मिलने का आश्वासन दिया गया था। कांस्टेबल का दावा है कि उसने जरूरी सामान और व्यवस्थाओं पर कुल 1,87,890 रुपये खर्च किए। इसके बाद उसने संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए। कार्यालय में जांच के बाद बिल भुगतान के लिए स्वीकृत भी हो गए थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 6 फरवरी 2026 को तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी ने कांस्टेबल को अपने पास बुलाकर भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए। उसे बताया गया कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर जरूरी हैं और स्वीकृत राशि मिल जाएगी। आरोप है कि हस्ताक्षर करने के बावजूद कांस्टेबल को रकम का भुगतान नहीं हुआ।
फंड से निकले 2.35 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिलने का आरोप
कांस्टेबल ने जुलाई 2026 में शिकायत करने के बाद कार्यालय की लेखा शाखा से भुगतान के बारे में जानकारी ली। उसके अनुसार उसे पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उसके खाते में जमा नहीं हुई। इससे उसे अपनी देनदारियां चुकाने के लिए निजी संसाधनों से पैसे की व्यवस्था करनी पड़ी।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो वर्षों में कुल 2.35 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी हुई थी। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल किन कामों के लिए किया गया, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे फंड में धन की कमी होने की बात सामने आई।
कांस्टेबल की स्वीकृत राशि फंड के खाते में डालने का आरोप
जांच में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार संजीव कुमार गांधी का एसएसपी शिमला के पद से कार्मिक विभाग में तबादला होने के समय फंड में हुई कमी को पूरा करने के लिए कांस्टेबल के बिलों की स्वीकृत राशि संबंधित फंड के खाते में स्थानांतरित की गई। आरोप है कि यह रकम कांस्टेबल को देने के बजाय फंड के खाते में जमा कर दी गई। इस कारण उसे स्वीकृत भुगतान नहीं मिला। रिकॉर्ड में फंड से पहले निकाली गई रकम के खर्च का विवरण भी उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है।
इन तथ्यों के आधार पर पुलिस थाना सदर में संजीव कुमार गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
जनवरी 2023 से फरवरी 2026 तक शिमला के एसपी रहे गांधी
संजीव कुमार गांधी 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह जनवरी 2023 से फरवरी 2026 तक शिमला के पुलिस अधीक्षक रहे। जनवरी 2026 में डीआईजी पद पर पदोन्नति के बाद उन्हें 9 फरवरी को हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक का कार्यभार सौंपा गया था। 24 फरवरी को उन्हें कार्मिक विभाग में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद उन्हें डीआईजी ट्रैफिक, टूरिज्म एंड रेलवे (टीटीआर) के पद पर तैनात किया गया। वह 24 मार्च से इस पद पर कार्यरत थे। अगस्त 2026 में सरकार ने उनकी सेवाएं फिर कार्मिक विभाग को सौंप दी थीं। बाद में उन्हें हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, कांगड़ा के प्रबंध निदेशक पद पर नियुक्त किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

