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2.48 लाख लोगों से 500 करोड़ रुपये की क्रिप्टो ठगी, ईडी ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

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2.48 लाख लोगों से 500 करोड़ रुपये की क्रिप्टो ठगी, ईडी ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार


शिमला, 17 जुलाई (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला सब-जोनल कार्यालय ने हिमाचल और पंजाब में दर्ज मामलों से जुड़े बहुचर्चित कथित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया है। ईडी ने तीनों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया। इसके बाद विशेष पीएमएलए अदालत शिमला में पेश किया गया। अदालत ने आगे की जांच के लिए तीनों को 12 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया।

ईडी के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईडी ने यह जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा सुभाष शर्मा तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच के अनुसार आरोपियों ने कोर्वियो, डीजीटी, हाइपनैक्स्ट और ए-ग्लोबल जैसे कई फर्जी निवेश मंच बनाकर लोगों को अधिक और निश्चित मुनाफे का लालच दिया और बड़ी संख्या में निवेश कराया।

जांच एजेंसियों और ईडी की पड़ताल में सामने आया कि वर्ष 2018 में सुभाष शर्मा ने हेम राज, मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और अन्य साथियों के साथ मिलकर क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना शुरू की। इसके लिए एक ऑनलाइन मंच तैयार किया गया, जिसे बाद में डिजिटल ओशन के विदेशी सर्वरों पर स्थानांतरित कर korvio.io और voscrow.com जैसे डोमेन के जरिए चलाया गया।

ईडी के अनुसार लोगों को कोर्वियो कॉइन (केआरओ) में निवेश करने पर ऊंचे और तय मुनाफे का झूठा भरोसा दिया गया। इसके लिए प्रचार कार्यक्रम आयोजित किए गए, टोकन की कीमतों में हेरफेर की गई और पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए नए निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरी व्यवस्था पॉन्जी स्कीम की तरह चलाई जा रही थी।

ईडी प्रवक्ता ने बताया कि धोखाधड़ी छिपाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन से जुड़ा डाटा भी मिटा दिया गया था। हालांकि बरामद डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि इस कथित धोखाधड़ी का शिकार 2.48 लाख से अधिक लोग बने। जांच में 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के लेनदेन का पता चला है और निवेशकों को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

जांच में ईडी ने मिलन गर्ग को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख मास्टरमाइंड और तकनीकी विशेषज्ञ बताया है। एजेंसी के अनुसार उसने कोर्वियो/वोस्क्रो, हाइपनैक्स्ट और ए-ग्लोबल जैसे मंच विकसित किए और उन पर नियंत्रण रखा। वह क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट का संचालन करता था, निवेशकों को एक मंच से दूसरे मंच पर ले जाने की व्यवस्था करता था, निवेशकों की रकम का प्रवाह नियंत्रित करता था, नकदी को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने में भूमिका निभाता था और तकनीकी व वित्तीय गतिविधियों की निगरानी करता था।

ईडी के मुताबिक सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा इस कथित योजना के शुरुआती प्रचारकों में शामिल थे। दोनों ने लोगों को अधिक मुनाफे का भरोसा देकर बड़ी संख्या में निवेशक जोड़े। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों ने निवेशकों से बड़ी मात्रा में नकदी एकत्र कर सुभाष शर्मा के निर्देश पर विजय जूनेजा, माशूम जूनेजा और अन्य सह-आरोपियों तक पहुंचाई।

जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों आरोपियों ने इस योजना से भारी कमीशन कमाया और अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई संपत्तियों में लाभकारी हिस्सेदारी भी हासिल की। ईडी के अनुसार जूनेजा स्क्वायर नामक संपत्ति में सुखदेव ठाकुर की 10 प्रतिशत और अभिषेक शर्मा की 5 प्रतिशत लाभकारी हिस्सेदारी पाई गई है।

ईडी ने यह भी बताया कि सुखदेव ठाकुर ऐसे बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट का संचालन करता था, जिनके जरिए इस कथित घोटाले से जुड़ी रकम का लेनदेन किया गया। वहीं अभिषेक शर्मा के बैंक खाते में भी ऐसे लोगों और संस्थाओं के साथ बड़े वित्तीय लेनदेन मिले हैं, जिन पर क्रिप्टोकरेंसी और रियल एस्टेट परियोजनाओं के जरिए अपराध से अर्जित धन को वैध बनाने का आरोप है।

तीनों आरोपी पहले से ही मूल आपराधिक मामले में न्यायिक हिरासत में थे। ऐसे में ईडी ने विशेष पीएमएलए अदालत, शिमला में प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन किया। अदालत की अनुमति मिलने के बाद तीनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। ईडी अब यह पता लगा रही है कि इस कथित क्रिप्टो धोखाधड़ी से कुल कितना अपराध से अर्जित धन तैयार हुआ और उसे किस तरह वैध बनाया गया।

ईडी ने बताया कि इस मामले में इससे पहले हेम राज और माशूम जूनेजा को भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा अभी फरार है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा