home page

विदेश में नौकरी का झांसा देने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

 | 
विदेश में नौकरी का झांसा देने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार


नई दिल्ली, 29 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय फर्जी वीजा गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरोह रूस, तुर्की और अजरबैजान में मोटी सैलरी वाली नौकरी का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये ऐंठता था। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से पांच पीड़ितों के मूल पासपोर्ट, सात मोबाइल फोन, नकदी और कई फर्जी पहचान पत्र बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बिहार के सिवान निवासी सलाउद्दीन मंसूरी उर्फ हैदर खान, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर निवासी कौसर और गाजियाबाद निवासी मोहम्मद शहजाद के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार तीनों एक संगठित गिरोह के तौर पर काम कर रहे थे और अब तक सैकड़ों लोगों को निशाना बना चुके हैं।

क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त पंकज कुमार ने बुधवार काे बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली थी कि एक गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विदेश में नौकरी के विज्ञापन देकर लोगों से ठगी कर रहा है। इसके बाद इंस्पेक्टर संजय कौशिक की टीम ने तकनीकी निगरानी और फील्ड जांच के आधार पर आरोपितों की गतिविधियों पर नजर रखी। पुख्ता सूचना मिलने पर पीतमपुरा के पास छापेमारी कर तीनों को दबोच लिया गया।

जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपित सलाउद्दीन खुद को कोलकाता की फर्जी कंपनी ‘सबा एंटरप्राइजेज’ का एचआर मैनेजर बताकर पीड़ितों से संपर्क करता था। सोशल मीडिया पर रूस, तुर्की और अजरबैजान में नौकरी के आकर्षक विज्ञापन पोस्ट किए जाते थे। विज्ञापन पर क्लिक करते ही आवेदकों को व्हाट्सएप और फेसबुक बिजनेस अकाउंट से जोड़ा जाता था, जहां उनसे पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज मांगे जाते थे।

आरोपित पासपोर्ट की स्कैन कॉपी लेकर उस पर फर्जी वीजा स्टांप तैयार करते थे और नकली वीजा, फर्जी जॉब लेटर तथा अस्थायी या रद्द हवाई टिकट भेजकर भरोसा दिलाते थे कि वीजा प्रक्रिया पूरी हो गई है। इसके लिए ऑनलाइन फर्जी वेरिफिकेशन लिंक भी बनाए गए थे, ताकि दस्तावेज असली प्रतीत हों। पीड़ित जब एयरपोर्ट जाने या यात्रा की तैयारी करते थे तब उन्हें पता चलता था कि उनके असली पासपोर्ट पर कोई वीजा नहीं लगा है और टिकट भी रद्द हो चुके हैं। तब तक आरोपित मोबाइल फोन बंद कर फरार हो जाते थे।

पुलिस के मुताबिक गिरोह लगातार ठिकाने बदलकर कोलकाता, गोरखपुर, नोएडा और पटना से ऑपरेट करता था ताकि कानून की पकड़ से बच सके। मुख्य सरगना मोहम्मद मुन्ना फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस ने आरोपितों को अदालत में पेश कर सात दिन की रिमांड पर लिया है और वित्तीय लेनदेन तथा अन्य पीड़ितों की पहचान की जा रही है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी