एटीएस-एनआईए अधिकारी बनकर रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट किया, 30 लाख ठगे, आरोपित गिरफ्तार
नई दिल्ली, 23 अगस्त (हि.स.)। साइबर ठगों ने दिल्ली में एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी को आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर 30 लाख रुपये ठग लिए। आरोपितों ने खुद को एटीएस, एनआईए और आरबीआई का अधिकारी बताकर पीड़ित से वीडियो कॉल पर पूछताछ की और उसे गिरफ्तारी का डर दिखाया। क्राइम ब्रांच की टीम ने इस मामले में फतेहाबाद, हरियाणा निवासी सुनील सिंगला को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम जिस खाते में पहुंची, वह पहले से सात अन्य साइबर ठगी के मामलों में भी इस्तेमाल हो चुका है।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त हर्ष इंदौरा ने रविवार को बताया कि द्वारका निवासी सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी ने शिकायत दी थी कि कुछ लोगों ने उन्हें फोन और वॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया। आरोपितों ने खुद को एटीएस, एनआईए और आरबीआई का अधिकारी बताया। उन्होंने पीड़ित को दिल्ली के लाल किले में हुए विस्फोट से जुड़े आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसा होने की बात कही। गिरफ्तारी की धमकी देकर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया।
आरोपितों ने पीड़ित को वॉट्सऐप पर फर्जी सरकारी दस्तावेज, गोपनीयता समझौते और आरबीआई से जुड़े कागजात भेजे। उसे लगातार वीडियो कॉल पर रहने और किसी से संपर्क नहीं करने के लिए कहा गया। इसके बाद बैंक खाते, एफडी और दूसरी संपत्तियों की जानकारी मांगी गई। डर के कारण पीड़ित ने अपनी रकम निकालकर आरोपितों के बताए बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए कुल 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जांच में पता चला कि ठगी की रकम में से 15 लाख रुपये श्री बालाजी ट्रैक्टर के नाम से चल रहे बैंक खाते में पहुंचे थे। बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद पुलिस ने खाते के संचालक सुनील सिंगला की पहचान की। उसे 11 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, सुनील सिंगला श्री बालाजी ट्रैक्टर का संचालक और मालिक/साझेदार है। जांच में उसके बैंक खाते में बड़ी रकम के संदिग्ध लेनदेन मिले। यह खाता देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज सात अन्य साइबर ठगी के मामलों में भी इस्तेमाल हुआ था। पुलिस को यह भी पता चला कि सुनील को पहले भी दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ/स्पेशल सेल में दर्ज इसी तरह के साइबर ठगी के एक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। क्राइम ब्रांच अब ठगी की रकम के पूरे लेनदेन, आरोपित के अन्य साथियों और नेटवर्क से जुड़े दूसरे बैंक खातों की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह में फर्जी या दूसरे लोगों के नाम पर चल रहे खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजने और निकालने के लिए किया जाता था। मामले में आगे की जांच जारी है।
वहीं पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी या जांच एजेंसी वॉट्सऐप वीडियो कॉल पर पूछताछ करके गिरफ्तारी का डर नहीं दिखाती और न ही किसी खाते में रकम ट्रांसफर करने को कहती है। ऐसे फोन आने पर घबराएं नहीं और बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी, आधार, पैन या खाते का पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें या नजदीकी थाने में सूचना दें।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

