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डिजिटल अरेस्ट और निवेश ठगी गिरोह का पर्दाफाश, तीन आरोपित गिरफ्तार

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डिजिटल अरेस्ट और निवेश ठगी गिरोह का पर्दाफाश, तीन आरोपित गिरफ्तार


नई दिल्ली, 11 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए “डिजिटल अरेस्ट” और ऑनलाइन निवेश ठगी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के साथ ही अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय एक संगठित गिरोह का भी खुलासा हुआ है, जो म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करता था।

पहला मामला: 47.74 लाख की डिजिटल अरेस्ट ठगी

क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने शनिवार को बताया कि क्राइम ब्रांच में दर्ज ई-एफआईआर के अनुसार, एक पीड़ित से 47.74 लाख रुपये की ठगी की गई थी। आरोपितों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और जांच के नाम पर रकम तथाकथित सुरक्षित खातों में ट्रांसफर करा ली। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर भेजी गई। करीब 18.74 लाख रुपये की राशि बदायूं उप्र से जुड़े खाते में ट्रेस की गई। तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस ने 8 अप्रैल को बदायूं निवासी गौतम सिंह (25) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने 15 हजार रुपये के बदले अपना बैंक खाता और मोबाइल सिम सह-आरोपित फरहान को दे दिया था। इसके बाद पुलिस ने फरहान (30) को नोएडा से गिरफ्तार किया। उसने खुलासा किया कि वह कमीशन लेकर ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम ट्रांसफर करने में किया जाता था। पुलिस ने आरोपितों के पास से मोबाइल फोन और बैंक किट भी बरामद किए हैं।

दूसरा मामला: 35 लाख की ऑनलाइन निवेश ठगी

पुलिस उपायुक्त के अनुसार क्राइम ब्रांच ने एक अन्य मामले में 35 लाख रुपये की ऑनलाइन निवेश ठगी का भी खुलासा किया है। इस मामले में पीड़ित को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अधिक मुनाफे का लालच देकर फर्जी ट्रेडिंग स्कीम में निवेश कराया गया। जांच में पता चला कि ठगी की पूरी रकम दिल्ली में रजिस्टर्ड एक फर्जी फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बागपत निवासी अंकुश को इस फर्म का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता पाया गया। पुलिस टीम ने उसे बडौत के पास से गिरफ्तार किया। पूछताछ में अंकुश ने बताया कि उसने स्थानीय व्यक्ति के कहने पर फर्म और बैंक खाता खुलवाया था, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि यह खाता कई अन्य साइबर ठगी मामलों में भी इस्तेमाल हुआ है, जिससे बड़े नेटवर्क के संकेत मिलते हैं।

पुलिस की सलाह

दिल्ली पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस अधिकारी के अनुसार, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले निवेश के लालच भरे ऑफर से सावधान रहें। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत भरोसा न करें और ठगी की आशंका होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी