10 साल से उम्रकैद के दो फरार भाइयों को पुलिस ने दबोचा, एक मुंबई के सुपारी हत्याकांड में भी वांछित
नई दिल्ली, 07 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने करीब एक दशक से फरार चल रहे उम्रकैद की सजा पाए दो सगे भाइयों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में 56 वर्षीय फिरासत अली और 51 वर्षीय शाहनवाज अली शामिल हैं। दोनों 1996 के राजौरी गार्डन हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए थे, लेकिन 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अपील खारिज होने के बावजूद जेल में आत्मसमर्पण नहीं किया और फरार हो गए। इनमें से फिरासत अली वर्ष 2006 के मुंबई के बहुचर्चित सुपारी हत्या कांड में भी वांछित था, जिसमें दो लाख रुपये की सुपारी लेकर एक व्यक्ति की हत्या करने के बाद उसके शव के टुकड़े कर पहचान मिटाने की कोशिश की गई थी।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि एंटी रनअवे सेल (एआरएससी) की टीम लगातार संगीन अपराधों में फरार आरोपितों की तलाश कर रही थी। इसी दौरान गुप्त सूचना मिली कि दोनों भाई अलग-अलग राज्यों में छिपकर रह रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की निगरानी में दो अलग-अलग टीमें गठित की गईं। एक टीम को मुरादाबाद और दूसरी टीम को झारखंड के गोड्डा भेजा गया। चार जुलाई को दोनों स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई ताकि एक आरोपित दूसरे को सूचना न दे सके। कार्रवाई के दौरान फिरासत अली को मुरादाबाद और शाहनवाज को गोड्डा से गिरफ्तार कर लिया गया।
1996 में साड़ी खरीदने के विवाद ने ले ली थी जान
पुलिस के अनुसार, 27 सितंबर 1996 की सुबह दिल्ली के रघुबीर नगर स्थित पुराने कपड़ों के बाजार में साड़ी खरीदने को लेकर दो परिवारों के बीच विवाद हुआ था। विवाद के दौरान शाहनवाज ने शिकायतकर्ता के भाई इश्तियाक अहमद उर्फ पप्पू को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी।
उसी दिन शाम करीब साढ़े चार बजे शाहनवाज अपने भाई फिरासत अली, अरशद अली और साथी जहांगीर खान के साथ शिकायतकर्ता के घर पहुंचा। आरोपितों ने घर में घुसते ही चाकुओं से हमला कर दिया। फिरासत और शाहनवाज ने बाथरूम में मौजूद इश्तियाक अहमद पर गर्दन और सीने पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे उसकी मौत हो गई। वहीं रियासत उर्फ भूरा और डब्बू पर भी चाकुओं से हमला कर उन्हें घायल कर दिया। शिकायतकर्ता के शोर मचाने पर सभी आरोपी फरार हो गए। इस मामले में राजौरी गार्डन थाने में हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
उम्रकैद की सजा, फिर जमानत और उसके बाद फरारी
मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 2000 में तीस हजारी कोर्ट ने फिरासत अली और शाहनवाज समेत अन्य आरोपितों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। बाद में हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान दोनों भाइयों को जमानत मिल गई। करीब 16 साल बाद, 12 मई 2016 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट की सजा को बरकरार रखते हुए तत्काल जेल में सरेंडर करने के आदेश दिए। इसके बावजूद दोनों फरार हो गए। शाहनवाज तब से लगातार पुलिस से बचता रहा, जबकि फिरासत बाद में एक अन्य हत्या के मामले में गिरफ्तार हुआ।
मुंबई में दो लाख की सुपारी लेकर की थी हत्या, शव के किए थे टुकड़े
जांच में सामने आया कि जमानत पर बाहर रहने के दौरान फिरासत अली वर्ष 2006 में मुंबई के एक चर्चित सुपारी हत्याकांड में शामिल हो गया। 14 मई 2006 को मुंबई के भिंडी बाजार स्थित मस्तान तालाब के पास प्लास्टिक के बैग में एक अज्ञात व्यक्ति का धड़ मिला था। शव का सिर और दोनों हाथ-पैर गायब थे, जिससे उसकी पहचान नहीं हो सकी। करीब 12 वर्ष बाद मुंबई पुलिस ने मामले का खुलासा किया। जांच में पता चला कि मृतक की पहचान किसान खरवा के रूप में हुई। उसकी पत्नी बंसीबेन खरवा ने घरेलू विवाद और पति की प्रताड़ना से परेशान होकर दो लाख रुपये की सुपारी देकर फिरासत अली और उसके साथी इरशाद अली से पति की हत्या करवाई थी।
तिहाड़ जेल भेजे गए, मुंबई पुलिस को भी दी गई सूचना
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपितों को दिल्ली लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। दिल्ली पुलिस ने मुंबई पुलिस को भी फिरासत अली की गिरफ्तारी की सूचना दे दी है, क्योंकि वह वहां दर्ज सुपारी हत्या के मामले में भी वांछित है। क्राइम ब्रांच का कहना है कि यह कार्रवाई दर्शाती है कि गंभीर अपराध कर वर्षों तक कानून से बचने वाले अपराधियों को भी आखिरकार न्याय के कटघरे तक लाया जा सकता है। दोनों मामलों से जुड़ी आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

