पुलिस ने पांच नाबालिगों को खोजकर परिवार से मिलवाया
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने अलग-अलग ऑपरेशन चलाकर पांच लापता नाबालिग बच्चों को खाजेकर उनके परिवारों से मिलाया है। दिल्ली और उप्र के विभिन्न इलाकों में चलाए गए इन अभियानों में पुलिस ने तकनीकी निगरानी से यह सफलता हासिल की।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त पंकज कुमार ने शुक्रवार को बताया कि इन पांच मामलों में सबसे खास मामला एक 14 वर्षीय लड़के का रहा, जो वर्ष 2021 से लापता था। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी और बच्चे का सुराग देने पर 20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। लंबी तलाश के बाद टीम ने उसे त्रिलोकपुरी इलाके से उसे बरामद किया।
जांच में सामने आया कि वह पढ़ाई न करने पर परिजनों की डांट से परेशान होकर घर छोड़कर चला गया था। इसके बाद उसने करीब दो साल राजस्थान में खेती से जुड़ा काम किया और फिर तीन साल तक मेरठ में बैंड बाजा में काम करता रहा।
दूसरे मामले में 16 वर्षीय किशोरी 19 मार्च 2026 से लापता थी। जांच के दौरान पता चला कि वह अपने पड़ोस के एक युवक के संपर्क में थी, जो अपने परिवार के साथ उप्र के जालौन चला गया था। लड़की भी 13 अप्रैल को ट्रेन से जालौन पहुंच गई और वहीं उसके घर पर रह रही थी। पुलिस टीम ने उसे सुरक्षित बरामद कर लिया।
तीसरे मामले में 14 वर्षीय लड़की 22 अप्रैल को घर से लापता हो गई थी। पूछताछ में पता चला कि वह मां की डांट-फटकार से नाराज होकर घर छोड़कर चली गई थी और आसपास के इलाके में भटकती रही। एक महिला ने उसे रात में खाना और ठहरने की जगह दी। पुलिस ने उसे हैदरपुर इलाके से ढूंढ लिया।
चौथे मामले में 16 वर्षीय किशोरी 17 अप्रैल से लापता थी। उसने अपने दोस्तों के साथ बिहार जाने की योजना बनाई थी और बिना बताए घर से निकल गई थी। पुलिस ने उसे बवाना इलाके से बरामद किया।
पांचवें मामले में 16 वर्षीय लड़की मां की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर अपने रिश्तेदारों के पास उप्र के सुल्तानपुर चली गई थी। उसे बुराड़ी इलाके से ढूंढ लिया गया। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि हर लापता बच्चे की शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और समय रहते कार्रवाई कर उन्हें सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

