दिल्ली पुलिस के हत्थे 13 साल बाद चढ़ा 50 हजार का इनामी ठग
नई दिल्ली, 26 मई (हि.स.)। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 13 साल पुराने ठगी के मामले में 50 हजार के इनामी घोषित अपराधी को गुजरात के सूरत से गिरफ्तार किया है। आरोपित फर्जी पहचान और नकली चेक के जरिए दवा कंपनियों से करोड़ों रुपये का माल लेकर फरार हो जाता था। पुलिस के मुताबिक आरोपित ने अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर फार्मा कंपनियों को करीब 98 लाख रुपये का चूना लगाया था। गिरफ्तार आरोपित की पहचान हिम्मत सिंह लोढ़ा (65) के रूप में हुई है। वह मूल रूप से राजस्थान के उदयपुर जिले का रहने वाला है और पिछले कुछ समय से गुजरात के सूरत में रह रहा था। आरोपित दिल्ली के पंजाबी बाग और रानी बाग थाना क्षेत्रों में दर्ज दो बड़े धोखाधड़ी मामलों में घोषित अपराधी था। उसकी गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस ने 50 हजार का इनाम भी घोषित कर रखा था।
पुलिस उपायुक्त संजीव यादव ने मंगलवार काे बताया कि वर्ष 2013 में पंजाबी बाग थाने में एक फार्मास्यूटिकल कंपनी के उपाध्यक्ष की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। जांच में सामने आया कि आरोपित ने खुद को कपिल वर्मा बताकर एम/एस केम्पको फार्माकेम और एचएम एंटरप्राइजेज का मालिक बताया। उसने कंपनी का भरोसा जीतकर करीब 550 किलोग्राम ग्लिक्लाजाइड नामक फार्मास्यूटिकल कच्चा माल मंगवाया, जिसकी कीमत करीब 26 लाख रुपये थी। भुगतान के लिए आरोपित ने पोस्ट डेटेड चेक दिए, लेकिन जब कंपनी ने बैंक में चेक लगाए तो वे अकाउंट क्लोज्ड बताकर वापस आ गए। इसके बाद आरोपित दफ्तर और किराये का मकान खाली कर फरार हो गया। लगातार गैरहाजिर रहने पर अदालत ने 27 जुलाई 2016 को उसे भगाेड़ा घोषित कर दिया।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपित रानी बाग थाने में दर्ज एक अन्य मामले में भी वांछित था। इस बार उसने कैलाश जैन नाम से पहचान बनाई और एचएम एंटरप्राइजेज के नाम पर एक फार्मा कंपनी से लगभग 72 लाख रुपये मूल्य का करीब 2575 किलोग्राम एंब्रोक्सोल एचसीएल नामक कच्चा माल हासिल कर लिया। माल लेने के बाद आरोपी ने कंपनी बंद कर दी, किराये का दफ्तर खाली कर दिया और बैंक खाता भी बंद कर फरार हो गया।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार लंबे समय से फरार घोषित अपराधियों को पकड़ने के अभियान के तहत क्राइम ब्रांच की मध्य रेंज टीम को आरोपित की तलाश की जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस टीम ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले और तकनीकी निगरानी के साथ मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। करीब एक महीने की लगातार मेहनत के बाद आरोपित के सूरत में मौजूद होने के इनपुट मिले। इंस्पेक्टर विनय कुमार की निगरानी में एसआई रितेश कुमार, एसआई विकास सोलंकी, एसआई जय कुमार और हेड कांस्टेबल बिजेंद्र सिंह की टीम ने गुजरात के सूरत स्थित अक्षर टाउनशिप, पर्वत पाटिया इलाके में लगातार निगरानी की। 24 मई को पुलिस ने आरोपित को दबाेचा। पूछताछ में आरोपित ने दोनों मामलों में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। पुलिस के मुताबिक आरोपित पिछले 13 वर्षों से लगातार नाम, पहचान और ठिकाने बदलकर कानून से बचता रहा। वह कभी कपिल वर्मा तो कभी कैलाश जैन बनकर कारोबार करता था। फर्जी दस्तावेज और नकली पहचान के जरिए कंपनियों का भरोसा जीतता और फिर बड़ी मात्रा में कच्चा माल लेकर गायब हो जाता था।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

